सर्वोच्च न्यायालय ने ज़ाहिरा शेख मामले की जाँच रजिस्ट्रार जनरल से करवाने के आदेश दिए हैं.
न्यायालय ने तीन महीने के भीतर जाँच करने के आदेश दिए हैं.
हालांकि न्यायालय ने मुंबई की विशेष अदालत में चल रही बेस्ट बेकरी मामले की सुनवाई को रोकने से इंकार कर दिया है.
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड़ की एक याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने ये आदेश दिए हैं.
बड़ौदा के बेस्ट बेकरी मामले में मुख्य गवाहों में से एक ज़ाहिरा शेख ने अपने पिछले बयान से मुकरते हुए कहा था कि सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड़ के दबाव में उन्होंने बयान दिया था.
इसके बाद तीस्ता शीतलवाड़ ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करके इस मामले की जाँच करवाने का अनुरोध किया था.
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि रजिस्ट्रार जनरल चाहें को दिल्ली के किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मदद ले सकते हैं.
उल्लेखनीय है कि बेस्ट बेकरी में गुजरात दंगों के समय 14 लोगों को ज़िंदा जलाकर मार दिया गया था.
गुजरात की एक अदालत में इस मामले की सुनवाई के बाद सुबूतों के अभाव में 21 अभियुक्तों को बरी कर दिया गया था.
इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद इस मामले की सुनवाई फिर शुरु हुआ फिर गवाहों को धमकाने की शिकायतों के बाद इस मामले को मुंबई की एक विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया.
इस विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान ही ज़ाहिरा शेख ने एक बार फिर बयान बदला और कहा कि दंगा करने वालों के ख़िलाफ़ बयान उन्होंने तीस्ता शीतलवाड़ के दबाव में दिया था.
यह भी उल्लेखनीय है कि इसके बाद अंग्रेज़ी अख़बार तहलका ने अपनी एक खोजपरक रिपोर्ट के आधार पर दावा किया था कि बयान बदलने के लिए ज़ाहिरा शेख को गुजरात के राजनीतिक नेताओं ने अठारह लाख रुपए दिए थे.