रविवार, 09 जनवरी, 2005 को 10:46 GMT तक के समाचार
भारत सरकार ने शीघ्र ही आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन करने और सूनामी की सूचना देने वाली प्रणाली की स्थापना करने का फैसला किया है.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सूनामी और राहत कार्यों की समीक्षा के लिए रविवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी.
इस बैठक में सूनामी और उसके बाद चल रहे राहत कार्यों को लेकर बहुत से सुझाव दिए गए.
उल्लेखनीय है कि 26 दिसंबर को आई सूनामी लहरों में दुनिया भर में डेढ़ लाख से अधिक लोग मारे गए थे. भारत में मारे गए लोगों की संख्या दस हज़ार से अधिक हो चुकी है.
साढ़े तीन घंटे चली इस बैठक के बाद बताया गया कि शरद पवार की अध्यक्षता वाली आपदा प्रबंधन कमेटी के सुझाव के अनुसार एक आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया जाएगा.
इसके लिए संसद के बजट सत्र में ही एक विधेयक लाया जाएगा.
सरकार ने सूनामी की सूचना देने के लिए एक प्रणाली विकसित करने का भी फैसला किया. हालांकि बैठक में भारतीय जनता पार्टी की मांग थी कि भारत को इस प्रणाली के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगाई जा रही प्रणाली का हिस्सा होना चाहिए.
पुनर्वास
बैठक के बाद गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने बताया कि सभी दलों द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार तय किया गया है कि राहत और पुनर्वास के कार्यों में अनाथ बच्चों और विधवाओँ की ओर विशेष ध्यान दिया जाए.
इस बैठक में मछुवारों के पुनर्वास को भी प्राथमिकता दिए जाने पर भी बल दिया गया.
शिवराज पाटिल के अनुसार बैठक में अनाथ हुए बच्चों को गोद लिए जाने के बारे में भी चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि गोद लेने के बारे में सरकार ने नियम बना रखे हैं और उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी.
उनका कहना था कि पहले रिश्तेदारों को तय करना होगा कि वे बच्चों को अपने पास रखना चाहते हैं या नहीं. यदि रिश्तेदार तैयार नहीं होते तब दूसरे परिवारों को गोद देने के बारे में विचार किया जाएगा.
राजनीतिक दलों ने त्रासदी के शिकार लोगों को मनोवैज्ञानिक सहायता देने पर भी ज़ोर दिया.
राहत सामग्री के वितरण के लिए राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी भेजे जाने की अनुमति दिए जाने की मांग करते हुए भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि इससे राहत सामग्री के वितरण में सुविधा होगी.
बैठक में यूपीए नेता सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, वामदलों के नेता नीलोत्पल बसु, वासुदेव आचार्य और एबी बर्धन और बसपा नेता मायावती आदि उपस्थित थे.