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शुक्रवार, 07 जनवरी, 2005 को 22:01 GMT तक के समाचार

सूनामी से नुक़सान के नए आँकड़े

भारत का कहना है कि सूनामी से उसे कुल मिलाकर 110 अरब रूपए का नुक़सान हुआ है.

इसमें से लगभग 80 अरब रूपए की क्षति तमिलनाडु, केरल, पांडिचेरी और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में हुई है जबकि लगभग 30 अरब रूपए का नुक़सान अंडमान निकोबार द्वीप समूह में हुआ है.

सरकार का अनुमान है कि उसे मृतकों के परिवारजनों को आर्थिक सहायता के रूप में एक अरब रूपए से अधिक देने होंगे.

भारतीय नागरिकों ने सूनामी पीड़ित लोगों ने काफ़ी आर्थिक सहायता दी है और सिर्फ़ प्रधानमंत्री राहत कोष में ही तीन अरब रूपए जमा हो गए हैं.

भारत में सूनामी से मरने वालों की संख्या लगभग दस हज़ार तक पहुँच गई है जबकि साढ़े पाँच हज़ार से अधिक लोग लापता हैं.

भारतीय सरकार ने अपने ख़ज़ाने से राहत के लिए लगभग पाँच अरब रूपए ख़र्च करने की घोषणा की है जिसमें निजी आर्थिक सहायता और गैर सरकारी संगठनों का अनुदान शामिल नहीं है.

आर्थिक विकास

भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि की दर पिछले वर्ष 8.2 प्रतिशत रही थी और अब अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि सूनामी के कारण आर्थिक वृद्धि की दर प्रभावित हो सकती है लेकिन अर्थव्यवस्था इतनी सक्षम है कि इससे जल्दी ही उबर जाएगी.

अर्थशास्त्री शेयर बाज़ार की ओर इशारा कर रहे हैं, वे कहते हैं कि बाज़ार पर बहुत फ़र्क़ नहीं पड़ा है इसी तरह अर्थव्यवस्था पर भी ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा.

आर्थिक मामलों के विश्लेषक सौमित्र चौधरी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, "हम उस दौर से निकल गए हैं जब प्राकृतिक आपदा आते ही भारत विदेशी सहायता का मोहताज हो जाता था."

भारत के ऊपर उतना विदेशी कर्ज़ भी नहीं है जितना इंडोनेशिया या श्रीलंका जैसे देशों पर है, भारत के सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में विदेशी कर्ज़ सिर्फ़ 21 प्रतिशत है जबकि इंडोनेशिया के मामले में यह आँकड़ा 80 प्रतिशत है.