मंगलवार, 04 जनवरी, 2005 को 01:55 GMT तक के समाचार
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी किया, यह नोटिस एक जनहित याचिका की वजह से दिया गया है जिसमें माँग की गई है कि राष्ट्रगान से 'सिंध' शब्द हटा दिया जाए क्योंकि वह भारत का हिस्सा नहीं है.
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रगान में पाकिस्तान के प्रांत को शामिल करने का कोई अर्थ नहीं है उसकी जगह कश्मीर या किसी अन्य राज्य के नाम को शामिल करना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरसी लाहोटी और न्यायमूर्ति जीपी माथुर की ओर से जारी नोटिस केंद्रीय गृह मंत्री, विदेश मंत्री और मानव संसाधन विकास मंत्री को भेजा गया है.
भारत सरकार हालांकि पहले कह चुकी है कि राष्ट्रगान में सिंध शब्द प्रांत के लिए नहीं है बल्कि यह एक संस्कृति का बोध कराता है लेकिन उसके बावजूद कोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया है.
याचिका दायर करने वाले वकील संजीव भटनागर का कहना है कि "गुरूदेव रवींद्रनाथ ठाकुर ने ख़ुद ही अपनी कृति का हिंदी अनुवाद किया था, उनका आशय सिंध प्रांत से ही था न कि संस्कृति से."
भटनागर ने कहा, "किसकी अभिव्यक्ति और किसका अनुवाद अधिक सही होगा, खुद कवि का या किसी और का."
उनका कहना है कि "अगर राष्ट्रगान में तथ्य की कोई ग़लती है तो उसे ठीक करने में इतनी समस्या नहीं होनी चाहिए, और फिर किसी अन्य राज्य का नाम जुड़ने से राष्ट्रीय एकता के लिए यह बेहतर ही होगा. "
सरकार
केंद्र सरकार का कहना है कि राष्ट्रगान को जिस रूप में गाया जाता है उसे संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को मंज़ूरी दी थी, इस सभा देश के सबसे बड़े और विद्वान नेता शामिल थे और वे अच्छी तरह जानते थे कि आज़ादी के बाद सिंध पाकिस्तान का हिस्सा है लेकिन उन्होंने इसे छेड़ना ठीक नहीं समझा.
भारत सरकार ने यह भी कहा है कि राष्ट्रगान से सिंध शब्द हटाए जाने देश के सिंधी समुदाय की भावनाएँ आहत हो सकती हैं जिन्होंने देश के विकास में बहुत योगदान दिया है.
केंद्र सरकार ने यह आशंका भी जताई है कि अगर याचिकाकर्ता की बात मानी गई तो इस बात का ख़तरा है कि लोग इसी आधार पर तरह-तरह के शब्दों को बदलने या हटाने की माँग करेंगे जो एक सिरदर्द साबित हो सकता है.