http://www.bbcchindi.com

शनिवार, 01 जनवरी, 2005 को 22:11 GMT तक के समाचार

चार्ल्स हैविलैंड
नागपट्टनम से

तबाह नागपट्टनम का भयावह नज़ारा

तमिलनाडु के नागपट्टनम ज़िले के अधिकारियों का कहना है कि सूनामी से मारे गए लोगों में से ज़्यादातर की लाशें अब मिल चुकी हैं.

तमिलनाडु के सिर्फ़ नागपट्टनम ज़िले में सूनामी की भेंट चढ़ने वालों की कुल संख्या 5819 हो गई है यानी सूनामी से अगर भारत में सबसे अधिक क्षति अगर कहीं हुई है तो नागपट्टनम में ही.

ज़ाहिर है, अब यहाँ राहत कार्य चल रहा है उन लोगों के लिए जो समुद्र की मार से बच गए हैं, अब असली चुनौती इन लोगों के लिए पीने का पानी और खाने का इंतज़ाम करने की है.

इतना ही नहीं, ज़िले का अधिकांश हिस्सा तबाह हो गया है, सड़क, पुल, स्कूल, अस्पताल, रेल की लाइनें...कुछ भी नहीं बचा है.

तबाह हो चुके इस इलाक़े में भारी मशीनों की मदद से सफ़ाई का काम चल रहा है और इक्का-दुक्का लाशें भी मिल रही हैं, ज़िले एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अब ज़्यादा लाशें नहीं मिलेंगी क्योंकि ज़्यादातर मलबा हटाया जा चुका है.

लेकिन जगह-जगह रोंगटे खड़े करने वाले दृश्य अब भी दिख जाते हैं, सड़ी हुई लाशें अब भी कहीं-कहीं दिख रही हैं, लाशों को जलाने का कोई पुख्ता इंतज़ाम नहीं है.

शरणार्थी शिविरों में खाने, पीने के पानी और शौचालयों का इंतज़ाम किया गया है, अधिकारी शिविरों की व्यवस्था को ठीक करने और बीमारी फैलने से रोकने के प्रयासों में लगे हैं.

मछुआरों की हालत काफ़ी ख़राब है क्योंकि उनके घर, नाव और जाल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं उनके पास अपनी आजीविका का कोई चारा नहीं है जिससे उनमें काफ़ी मायूसी है.

नागपट्टनम तमिलनाडु का एक पिछड़ा हुआ ज़िला है सूनामी ने उसे पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है, इस ज़िले में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसके परिवार के सदस्य की मौत न हुई हो या उसका घर-बार तबाह न हुआ हो.