शुक्रवार, 31 दिसंबर, 2004 को 15:57 GMT तक के समाचार
अंडमान के पुलिस प्रमुख ने कहा है कि सूनामी लहरों की चपेट में आकर लापता हुए हज़ारों लोगों के जीवित होने की संभावना अब समाप्त हो गई है.
अंडमान निकोबार द्वीप समूह के छोटे छोटे अनेक द्वीपों से बहुत बड़ी तादाद में लाशें निकाली गई हैं लेकिन हज़ारों लोग ऐसे हैं जो अभी तक लापता हैं.
अधिकारियों का कहना है कि लहरों के बहाव के कारण बहुत सारी लाशें जंगलों में अलग-अलग जगह बिखरी होंगी जिनकी शिनाख्त करना एक मुश्किल काम है.
वरिष्ठ सरकारी अधिकारी एके रस्तोगी का कहना है कि लापता लोगों की संख्या में कमी आई है क्योंकि बहुत सारे लोगों को लाशें मिल गई हैं और कुछ लोग जीवित भी पाए गए हैं लेकिन अब भी कम से कम तीन हज़ार लोग लापता हैं.
पुलिस प्रमुख शमशेर बहादुर देयोल ने कहा है कि इइस बात की पूरी संभावना है कि कुछ लोग जीवित हों और बहकर जंगलों में जा पहुँचे हों.
देयोल का कहना है कि अब भी जीवित बचने वाले लोग सामने आ रहे हैं लेकिन उनकी संख्या दिन पर दिन कम होती जा रही है. उन्होंने कहा, "यह उम्मीद को तोड़ने वाली बात है."
देयोल का कहना है कि अंडमान में कितनी बड़ी संख्या में लोग मारे गए हैं उसका सही आँकड़ा मिलना बहुत मुश्किल है.
अधिकारियों का यह भी कहना है कि सूनामी लहरों ने बहुत सारी लाशों को समुद्र के गर्त में धकेल दिया होगा जिसकी वजह से लापता लोगों की संख्या इतनी बड़ी हो गई है.
समस्याएँ
अंडमान निकोबार द्वीप समूह में सैकड़ों टापू हैं जिनमें से लगभग 40 पर लोग बसे हुए हैं, अधिकारियों का कहना है कि वे इन सभी टापुओं पर पहुँचने में कामयाब रहे हैं.
लेकिन छोटे-छोटे टापुओं तक पहुँचना भी एक बड़ी समस्या है, सैनिक अधिकारी लेफ़्टिनेंट जनरल बीएस ठाकुर ने बीबीसी को बताया कि सड़कों और नावों के तबाह हो जाने के कारण संपर्क बहुत बुरी तरह से बाधित हुआ है.
इस बीच, अधिकारियों ने कहा है कि अंडमान की आदिम जनजातियाँ सुरक्षित हैं, ओंगी, जारवा और सेंटीनलीज़ नाम की जनजातियों को सुरक्षित बताया गया है.
एके रस्तोगी ने बताया कि लापता हुए तीन हज़ार लोग निकोबारी हैं, लेकिन सबसे ज़्यादा चिंता ग्रेट निकोबार के शॉम्पेन जनजाति की है जिनकी कुल संख्या सिर्फ़ 400 है.