बुधवार, 29 दिसंबर, 2004 को 17:29 GMT तक के समाचार
अफ़ग़ानिस्तान के अंतरिम राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने देश में वर्षों की हिंसा के बाद पहली बार हुआ चुनाव जीत लिया है.
अफ़ग़ानिस्तान में अक्तूबर में पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए सीधे चुनाव हुए.
करज़ई को अपने प्रतिद्वंद्वियों से कहीं ज़्यादा 55 प्रतिशत वोट मिले.
चुनाव के बाद करज़ई के कई प्रतिद्वंद्वियों ने शिकायत की थी कि मतदान के बाद हाथ पर निशान लगाने के लिए जो स्याही प्रयोग की गई थी उसे मिटाया जा सकता था.
इस मामले की जाँच के लिए संयुक्त राष्ट्र का तीन सदस्यों वाला एक आयोग गठित किया गया था और उसने पाया कि मतदान प्रक्रिया में यदि कोई ख़ामी रही होगी तो भी उससे परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ा.
राष्ट्रपति हामिद करज़ई के मुख्य प्रतिद्वंद्वी यूनुस क़ानूनी ने पहले ही अपनी हार स्वीकार कर ली.
प्रतिद्वंद्वी
अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के लिए नौ अक्तूबर को हुए चुनाव में 18 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे.
इस पद के लिए कुल 23 लोगों ने दावा किया था जिसमें तीन के पर्चे चुनाव अधिकारियों ने ख़ारिज कर दिए जबकि दो ने पहले ही नाम वापस ले लिया था.
करज़ई ने ख़तरे गिनाए
राष्ट्रपति चुने जाने के बाद हामिद करज़ई ने कहा है कि देश को चरमपंथियों और नशीले पदार्थों के ग़ैरक़ानूनी व्यापारियों का डट कर मुकाबला करना होगा.
राष्ट्रपति करज़ई का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान को चरमपंथियों और इस ग़ैरक़ानूनी व्यापार से ख़तरा लगातार बना हुआ है.
राष्ट्रपति पद की शपथ लेने का बाद उन्होंने ये भी कहा कि अफ़ग़ानिस्तान अपने 'काले इतिहास का मुश्किल दौर' पीछे छोड़ आया है.
उनका कहना था कि जिस चुनाव के बाद उनका सत्ता में बना रहना तय हुआ, वह चुनाव 'आतंकवाद
की हार था.'
हामिद करज़ई ने 2001 में अफ़ग़ानिस्तान से तालिबान की सत्ता के पतन के बाद से अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर देश का शासन संभाला था.
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान उन्होंने कबायली नेताओं पर अंकुश लगाने, प्राइवेट लड़ाकों को काबू करने और ग़रीबी कम करने के जो वादे किए थे, वे उनको पूरा करेंगे.
पर्यवेक्षकों का कहना है कि राष्ट्रपति करज़ई के सामने गंभीर चुनौतियाँ हैं यदि उन्हें पूरे देश पर अपना प्रभाव और अधिकार कायम करना है.