रविवार, 12 दिसंबर, 2004 को 03:14 GMT तक के समाचार
नेपाल की राजधानी काठमांडू में भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के नेताओं की एक अभूतपूर्व बैठक शुरू हुई है.
दोनों तरफ़ के कश्मीर के नेताओं की संगठित रूप से बैठक का ये पहला मौक़ा है.
हालाँकि भारत प्रशासित कश्मीर की सरकार का कोई प्रतिनिधि और ना ही पाकिस्तान समर्थक चरमपंथी इस बैठक में हिस्सा लेने आया है.
तीन दिन की इस बैठक का आयोजन एक ग़ैर सरकारी संगठन पगवाश कॉन्फ्रेंसेज़ ऑफ़ साइंस एंड वर्ल्ड अफ़ेयर्स ने किया है.
इस संस्था को अंतरराष्ट्रीय राजनीति में परमाणु हथियारों के महत्व को कम करने में उनके योगदान के लि 1995 में नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है.
भाग लेने आए नेता
पहले भारतीय प्रशासित कश्मीर के अलगावादी संगठन हुर्रियत काँफ़्रेंस के नेताओं की भागीदारी को लेकर आशंकाएँ जताई जा रही थी, क्योंकि उनकी यात्रा के लिए आवश्यक दस्तावेज़ पर सवाल उठे थे.
लेकिन शनिवार को हुर्रियत के प्रमुख नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़, अब्दुल ग़नी बट, ग़ुलाम रसूल और अब्दुल्ला तारी काठमांडू पहुँच गए.
इस सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर पैंथर्स पार्टी के प्रमुख भीम सिंह और कश्मीर पीपुल्स काँफ़्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन भी शामिल हो रहे हैं.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के पूर्व प्रधानमंत्री बैरिस्टर सुल्तान महमूद भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेने आए हैं.
उद्देश्य
ग़ैर सरकारी संस्था पगवाश दुनियाभर के कई हिस्सों में शांति के लिए ऐसे सम्मेलनों का आयोजन कराती है.
तीसरे देश में कश्मीरी नेताओं के इकट्ठा होने को शांति प्रक्रिया की दिशा में ही एक क़दम माना जा रहा है.
पगवाश के महासचिव पावलो कोटा ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान में कश्मीर पर सम्मेलन कराने की सालों से कोशिश की थी.
पाकिस्तान और भारतीय प्रशासित कश्मीर के नेताओं की संयुक्त बैठक की पहले भी कोशिशें की गई थी लेकिन नाकाम रही थी.
आयोजकों का मानना है कि उन्हें भरोसा है कि इस सम्मेलन से दोनों ओर के कश्मीरी नेता और क़रीब आएँगे और शांति प्रक्रिया को बल मिलेगा.
काठमांडू से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि पाकिस्तानी हिस्से में पड़नेवाले कश्मीर के नेता कश्मीर के पाकिस्तान में विलय के समर्थक हैं.
वहीं भारत के हिस्से में पड़नेवाले कश्मीर के नेता स्वतंत्र कश्मीर की इच्छा रखते हैं.