शुक्रवार, 10 दिसंबर, 2004 को 08:49 GMT तक के समाचार
पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम के अलगाववादी संगठन अल्फ़ा ने भारत सरकार की बातचीत की पेशकश को ठुकरा दिया है.
युनाईटेड लिबरेशन फ़्रंट ऑफ़ असम यानी अल्फ़ा ने कहा है कि वह बातचीत के लिए हिंसा त्यागने की शर्त नहीं मान सकती.
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले सप्ताह विद्रोहियों के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखा था.
लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि भारत सरकार सिर्फ़ उन्हीं गुटों से बात करेगी जो हिंसा छोड़ेंगे.
मनमोहन सिंह ने विद्रोहियों के समक्ष अपना ये प्रस्ताव असमिया भाषा की प्रख्यात लेखिका इंदिरा गोस्वामी को लिखे गए एक पत्र के माध्यम से रखा था.
अल्फ़ा ने इंदिरा गोस्वामी को अपना मध्यस्थ बनाया है.
उन्होंने इस सिलसिले में भारतीय प्रधानमंत्री से बातचीत भी की है.
इंदिरा गोस्वामी ने अल्फ़ा के ताज़ा बयान के बाद कहा है कि उन्हें अभी भी उम्मीद है कि बातचीत के रास्ते बंद नहीं हुए हैं.
'भ्रामक प्रस्ताव'
अल्फ़ा ने कमांडर इन चीफ़ परेश बरूआ ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर प्रधानमंत्री के प्रस्ताव को भ्रामक बताया.
परेश बरूआ ने कहा,"पत्र कहता है कि भारतीय प्रधानमंत्री की पेशकश बिना शर्त है. मगर साथ ही उसमें लिखा है कि बातचीत उसी के साथ की जाएगी जो हिंसा त्यागते हैं. और ये अपने आप में एक शर्त है".
पूर्वोत्तर भारत में पिछले दो दशक से भी अधिक समय से सशस्त्र संघर्ष चलानेवाले अल्फ़ा ने हाल के दिनों में ऐसा संकेत दिया था कि वह सरकार के साथ बातचीत करने लिए तैयार है, मगर बातचीत बिना शर्त होनी चाहिए.
संवाददाताओं का कहना है कि अल्फ़ा बातचीत के एजेंडे में असम की संप्रभुता के मुद्दे को शामिल करवाना चाहता है मगर भारत सरकार को ये मंज़ूर नहीं है.