गुरुवार, 09 दिसंबर, 2004 को 10:14 GMT तक के समाचार
एक दिन के दौरे पर भारत आए अमरीकी रक्षामंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने भारत और अमरीका के संबंधों को और मज़बूत बनाने की बात कही है.
जॉर्ज बुश के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद भारत का दौरा करने वाले वे पहले शीर्ष नेता हैं.
उन्होंने भारत के रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी और विदेश मंत्री नटवर सिंह से मुलाक़ात की है.
प्रणव मुखर्जी से डेढ़ घंटे की बातचीत के बाद रम्सफ़ेल्ड ने कहा, "ये बहुत महत्वपूर्ण है कि दोनों देश आपसी सहयोग के अपने रिश्ते को और मज़बूती प्रदान करे और पिछले चार सालों से इसी ध्येय के साथ काम कर रहे हैं."
उन्होंने कहा कि भारत और अमरीका के संबंध बहुत मज़बूत हैं और अमरीका चाहता है कि आने वाले दिनों में वह और मज़बूत हो.
प्रणव मुखर्जी ने रम्सफ़ेल्ड के साथ अपनी बातचीत को सकारात्मक बताया है.
हालांकि एक दिन पहले यानी बुधवार को स्पष्ट शब्दों में कहा था कि पाकिस्तान को शस्त्र देने के अमरीकी प्रशासन के प्रस्ताव से भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही बातचीत और अमरीका से भारत के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि गुरुवार को हुई मुलाक़ात में इस विषय पर चर्चा ज़रुर हुई होगी.
उल्लेखनीय है कि अमरीकी प्रशासन ने पाकिस्तान को शस्त्रों की आपूर्ति के लिए अमरीकी कांग्रेस की अनुमति मांगी है. इन शस्त्रों में टीही विमान हैं और टैंकरोधी मिसाइलें शामिल हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अमरीका से पैट्रियाट मिसाइल प्रणाली और नौसेना के क्षेत्र में सहयोग के बारे में भी बात कर रहा है.
वैसे रम्सफ़ेल्ड सामरिक मामलों में भविष्य की रणनीति पर बातचीत के लिए पहुँचे हैं.
एनएसएसपी
अंतरिक्ष, परमाणु, तकनीक-व्यापार और मिसाइल रोधी प्रणाली जैसे विषयों पर परस्पर सहयोग के इस कार्यक्रम को अमरीका ने नेक्स्ट स्टेप इन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप (एनएसएसपी) का नाम दिया है.
उल्लेखनीय है कि इससे पहले इसी विषय पर चर्चा के लिए कोंडालिसा राइस भी भारत का एक दौरा कर चुकी हैं.