बुधवार, 08 दिसंबर, 2004 को 12:16 GMT तक के समाचार
मणिकांत ठाकुर
बीबीसी संवाददाता, पटना
बिहार के पटना हाईकोर्ट ने बुधवार को सरकार को राज्य के सभी जेलों में छापे मारने के निर्देश दिए हैं.
ये छापे बुधवार को 11 बजे से शुरु हुए और गुरुवार को 11 बजे तक चलेंगे.
हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि ये छापे बिहार सैन्य पुलिस से डलवाए जाएँ और जेल प्रशासन और राज्य की पुलिस को इससे दूर रखा जाए.
पटना हाईकोर्ट ने ये निर्देश इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की बिहार शाखा की एक याचिका पर जारी किए हैं.
इस याचिका में कहा गया था कि जेलों में बंद अपराधी मोबाइल फ़ोनों के ज़रिए अपना गिरोह चला रहे हैं और वहां से भी अपराध कार्यों में संलग्न हैं.
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नागेंद्र राय और एसएन हुसैन के एक पीठ ने निर्देश जारी करते हुए मीडिया से अनुरोध किया था कि 11 बजे से छापे शुरु होने के एक घंटे तक वे इस ख़बर को प्रसारित न करें जिससे जेल प्रशासन सतर्क होकर लीपापोती में न लग जाए.
अदालत ने निर्देश दिए हैं कि छापे लगातार 24 घंटों तक चलते रहें. ज़िलाधीशों को इन छापों का नेतृत्व करने को कहा गया है. जिन स्थानों पर ज़िलाधीश उपस्थित न हो सकें
वहाँ इस कार्रवाई का नेतृत्व मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी करें.
अधिकारियों को बुलावा
इस मामले पर सुनवाई के लिए अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव केएस सुब्रमण्यम और पुलिस महानिदेशक नारायण मिश्रा सहित कई बड़े अधिकारियों को उपस्थित रहने को कहा गया था.
न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि इन छापों के बाद यही अधिकारी अगली सुनवाई में उपस्थित हों और छापों के दौरान बरामद हथियारों और मोबाइल फ़ोन आदि का विवरण पेश करें.
पटना के एक सर्जन एनके अग्रवाल की हत्या के बाद बिहार के निजी और सरकारी डॉक्टर बढ़ते अपराधों के विरोध में हड़ताल की थी और इसी के बाद याचिका दायर की थी.
इसके अलावा पिछले दिनों जेल में बंद जनप्रतिनिधियों की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं.
उदाहरण के तौर पर लोकजनशक्ति पार्टी के विधायक राजन तिवारी पर आरोप लगा कि दो इंजीनियरों के अपहरण के पीछे वही थे.
मधेपुरा के राजद सांसद बेउर जेल में दरबार लगा रहे थे और इस पर आपत्ति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जाँच के आदेश दिए थे.
बिहार में कुछ 54 जेलें हैं जिनमें से छह ज़िला जेल हैं. इन जेलों में 38 हज़ार कैदी हैं जबकि इनकी कुछ क्षमता 20 हज़ार से अधिक की नहीं है.