गुरुवार, 02 दिसंबर, 2004 को 11:34 GMT तक के समाचार
भारत सरकार ने भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने की सफ़ाई की प्रक्रिया शुरु कर दी है.
इसकी शुरुआत एक सर्वक्षण से की जाएगी जिसमें बीस साल से बंद पड़े इस कारखाने में ज़हरीले कचरे का आकलन किया जाएगा और इसकी सफ़ाई में आने वाले खर्च का भी.
यूनियन कार्बाइड वही कारखाना है जिससे बीस साल पहले दो और तीन दिसंबर की दरम्यानी रात ज़हरीली गैस रिसी थी जिससे लगभग तीन हज़ार लोगों की मौत हुई थी और बाद के बरसों में कोई 15 हज़ार लोगों की मौत हुई.
इस हादसे में 50 हज़ार लोगों के प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया था.
अनुमान है कि कारखाने के भीतर अभी भी ढेर सारा ज़हरीला कचरा भरा हुआ है.
मध्यप्रदेश के गैस राहत मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि आरंभिक सर्वेक्षण का काम भारत सरकार की संस्था इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड को दिया गया है.
उन्होंने यह नहीं बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट कब तक आ जाएगी.
अमरीकी अदालत
जब उनसे पूछा गया कि जब अमरीका की एक अदालत ने यूनियन कार्बाइड को ख़रीदने वाली डाउ केमिकल्स को पहले ही निर्देश दे रखे हैं कि वे ज़हरीले कचरे का सर्वेक्षण करें तो फिर यही कार्य भारत सरकार क्यों कर रही है, उन्होंने जवाब दिया, "हमें तो क़दम उठाने ही होंगे."
हाल ही में न्यूयॉर्क की एक अदालत ने भारत सरकार और प्रदेश सरकार से कहा था कि वे बताएँ कि ज़हरीला कचरा हटाए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति तो नहीं है.
एक स्वयंसेवी संस्था की याचिका पर अमरीकी अदालत ने यह कार्रवाई की थी.
एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार केंद्र सरकार ने एक टास्क फ़ोर्स बनाया है जिसमें केंद्र सरकार के अलावा राज्य सरकार के अधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल हैं.
यूनियन कार्बाइड कारखाना अब राज्य सरकार की संपत्ति है. गैस त्रासदी के 14 सालों बाद 1998 में राज्य सरकार ने यूनियन कार्बाइड की लीज़ समाप्त कर दी थी.
लेकिन राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित नहीं किया था कि परिसर पर कब्ज़ा छोड़ने से पहले यूनियन कार्बाइड ने ज़हरीला कचरा हटाया या नहीं.
यूनियन कार्बाइड ने हमेशा यह कहकर कचरा साफ़ करने से इंकार कर दिया कि सरकार की संपत्ति होने के बाद वे यह कार्य कैसे कर सकते हैं.