मंगलवार, 23 नवंबर, 2004 को 15:46 GMT तक के समाचार
हत्या के एक मामले में ग़िरफ़्तार काँची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के ख़िलाफ़ तमिलनाडु पुलिस ने एक और मामला दर्ज किया है.
इस मामले में भी उनके ख़िलाफ़ ग़िरफ़्तारी का वारंट जारी किया गया है. अब जेल से रिहा होने के लिए शंकराचार्य को इन दोनों मामलों में जमानत लेनी होगी.
तमिलनाडु पुलिस का आरोप है कि जयेंद्र सरस्वती ने अपने एक पूर्व भक्त पर हमला करने का आदेश दिया था.
तमिलनाडु पुलिस की एक टीम ने वेल्लौर जेल में बंद शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती से मुलाक़ात की और उन्हें ग़िरफ़्तारी का वारंट सौंपा.
जयेंद्र सरस्वती न्यायिक हिरासत में हैं और इस समय वेल्लौर जेल में बंद हैं.
मामला
तमिलनाडु पुलिस का कहना है कि सितंबर 2002 में राधाकृष्णन पर कुछ लोगों ने हमला किया था. राधाकृष्णन को इस हमले में सिर्फ़ मामूली चोटें ही आईं थी और वे बचकर निकलने में सफल रहे थे.
इस मामले में उसी समय पुलिस केस दर्ज किया गया था लेकिन उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई थी.
तमिलनाडु पुलिस को शक है कि काँची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के कहने पर ही राधाकृष्णन पर हमला किया गया था.
इस मामले में ग़िरफ़्तारी का वारंट जारी होने के बाद शंकराचार्य को जेल से निकलने के लिए दोनों मामलों में ज़मानत लेनी होगी.
शंकराचार्य को इसी महीने की 11 तारीख़ को काँची मठ के एक पूर्व कर्मचारी की हत्या के मामले में ग़िरफ़्तार किया गया था.
शंकराचार्य अभी न्यायिक हिरासत में हैं. बीच में तमिलनाडु पुलिस ने इस मामले में पूछताछ के लिए उन्हें तीन दिनों के लिए पुलिस हिरासत में लिया था.
लेकिन अदालत ने उनकी पुलिस हिरासत बढ़ाने की अपील ठुकरा दी. वैसे उनकी ज़मानत की याचिका भी ठुकराई जा चुकी है.
भारतीय जनता पार्टी के साथ-साथ कट्टरपंथी हिंदू संगठन विश्व हिंदू परिषद ने भी शंकराचार्य की ग़िरफ़्तारी के विरोध में पिछले दिनों देशव्यापी बंद का आह्वान किया था.
जबकि भाजपा के शीर्ष नेताओं ने ग़िरफ़्तारी के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया था.