बुधवार, 17 नवंबर, 2004 को 20:41 GMT तक के समाचार
जम्मू-कश्मीर के दौरे पर गए भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत को वह प्रस्ताव मंज़ूर नहीं जिसमें कश्मीर की सीमा में बदलाव की बात कही गई है.
उन्होंने ये भी कहा कि धर्म के आधार पर भारत का दोबारा विभाजन नहीं होगा.
इसे पर्यवेक्षक पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की कश्मीर पर दिए अनौपचारिक सुझावों का जवाब मान रहे हैं जिसके तहत उन्होंने कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों को स्वायत्तता दिए जाने या फिर संयुक्त राष्ट्र के अधीन प्रशासित करने का ज़िक्र किया था.
प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर राज्य की यात्रा पर पहुँचे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आशा जताई कि कश्मीरी समृद्ध होंगे और इसके साथ ही उन्होंने वहाँ विकास और रोज़गार के अवसर पैदा करने के लिए 24 हज़ार करोड़ रुपयों की आर्थिक सहायता देने की भी घोषणा की.
उन्होंने कहा कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर राज्य के ऐसे किसी भी गुट के साथ बातचीत के लिए तैयार है जो हिंसा के ख़िलाफ़ हैं.
एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हालात सुधरे और सीमा पार से चरमपंथियों का आना का काबू में रहा तो वे सैनिकों की संख्या में और कटौती के बारे में विचार करेंगे.
उनके पहुँचने से पहले उनके सभा स्थल के पास ही सुरक्षा बलों का दो कथित चरमपंथियों के साथ मुक़ाबला हुआ.
अधिकारियों के अनुसार तीन घंटे की गोलीबारी के बाद दोनों चरमपंथियों की मौत हो गई.
उधर मनमोहन सिंह की घोषणा के मुताबिक़ बुधवार से जम्मू-कश्मीर राज्य के अनंतनाग ज़िले से सैनिकों की संख्या में कटौती शुरु हो गई.
अमन और इज़्ज़त
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि उनकी सरकार चाहती है कि कश्मीर में अमन और ख़ुशहाली के पुराने दिन लौटें और लोग इज़्ज़त के साथ अपने राज्य में रह सकें.
उन्होंने बातचीत के लिए सभी गुटों को न्यौता देते हुए कहा, "हम हर किसी से बातचीत के लिए तैयार हैं जिसे कश्मीर के अमन और ख़ुशहाली की चिंता हो."
उन्होंने कहा, "मेरा दिल नए ख़यालात के लिए खुला है."
मनमोहन सिंह ने कहा, " मैंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ से भी कहा है कि तमाम मसलों का हल निकाल सकते हैं बशर्ते हम दयानतदारी और हमदर्दी से काम लें."
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि कश्मीर के लोगों ने जो कुछ भुगता है उसके लिए उन्हें गहरा अफ़सोस है.
रोज़गार
उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि वे एक सामान्य परिवार से हैं इसलिए वे समझते हैं कि शिक्षा का क्या महत्व है.
उनका कहना था कि शिक्षा से ताक़त आती है. उन्होंने महिलाओं को भी शिक्षा देने की बात कही.
उन्होंने कहा कि बेकारी और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ भी लड़ाई बेहद ज़रुरी है.
प्रधानंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि अब सरकारों को अपना काम करने का तरीक़ा बदलना होगा.
उन्होंने कहा, "लोग अब नालायक सियासतदानों से थक चुके हैं. अब कुनबापरस्ती को रोकना होगा."
कश्मीरी जनता को आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि वे जानते हैं कि लोग चाहते हैं कि लाइन ऑफ़ कंट्रोल यानि नियंत्रण रेखा के पार जाना आसान हो ताकि वे अपने रिश्तेदारों से मिल सकें और व्यापार आदि आसान हो सके. उन्होंने कहा कि वे इस मसले पर भी पाकिस्तान से बात कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "आपने बहुत दुख सहे, हम पाकिस्तान के साथ बात कर रहे हैं ताकि बिना मतलब की हिंसा ख़त्म हो."
उन्होंने कहा कि वे कश्मीर के लोगों से, वहाँ के राजनीतिक दलों से और वहाँ काम कर रहे स्वयंसेवी संगठनों को आमंत्रित करते हैं कि वे अपनी राय दें ताकि नई मंज़िल पर पहुँचने में सफलता मिल सके.