मंगलवार, 09 नवंबर, 2004 को 08:54 GMT तक के समाचार
मैथ्यू ग्रांट
कोलकाता
भारतीय सेना ने कहा कि उसने पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ कुछ दिन पहले छेड़े गए बड़े अभियान के तहत मंगलवार को एक प्रमुख विद्रोही गुट के अस्थाई मुख्यालय पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
मणिपुर की राजधानी इंफ़ाल में एक सैन्य प्रवक्ता मेजर सांतनु देव गोस्वामी ने बीबीसी को बताया कि यह शिविर उन तीन शिविरों से एक है जिन्हें बर्मा सीमा पर भारतीय सैनिकों ने अपने क़ब्ज़े में लिया है.
सेना का कहना है कि उनका विश्वास है कि विद्रोही संगठन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ज़ोऊ ख़ूनम के इस शिविर को अपने अस्थाई मुख्यालय के तौर पर इस्तेमाल करता था.
मेजर गोस्वीमी कहा कि यह विद्रोहियों के लिए एक बड़ा झटका है और शिविर पर से जो संवेदनशील दस्तावेज़ और नक्शे वग़ैरा बरामद किए गए हैं उनसे यही शक होता है कि यह पीएलए का अस्थाई मुख्यालय था.
गोस्वामी ने बताया कि शिविर में से गोला-बारूद भी बरामद हुआ है और कुछ खाद्य सामग्री के साथ-साथ कंप्यूटर उपकरण भी मिले हैं लेकिन विद्रोही पहले ही भाग गए थे.
प्रवक्ता ने कहा कि सेना अब बर्मा के सीमावर्ती इलाक़ों में अन्य शिविरों में उनका पीछा करेगी, हो सकता है कि उनमें से कुछ अन्य राज्यों में घुस गए हों.
बर्मा का सहयोग
बर्मा ने भी इस अभियान में सहयोग देते हुए अपनी सीमा सील कर दी है और अपने क्षेत्र में कुछ सैनिक भी तैनात कर रखे हैं ताकि वे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से उसकी सीमा में नहीं घुस सकें.
लेकिन मेजर गोस्वामी ने फिर ज़ोर देकर कहा कि यह पूरा अभियान सिर्फ़ भारतीय सेना ही चला रही है और वह नहीं जानते कि बर्मा की सीमा के अंदर क्या हो रहा है.
बर्मा के एक सैनिक जनरल थान श्वे ने पिछले महीने भारत के दौरे के दौरान कहा था कि उनका देश पूर्वोत्तर क्षेत्र के विद्रोहियों को अपनी ज़मीन का इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं देगा.
ऐसा माना जा रहा है कि इस अभियन में भारत के क़रीब छह हज़ार सैनिक भाग ले रहे हैं.
मेजर गोस्वामी ने बताया कि अभी तक क़रीब 20 विद्रोही मारे जा चुके हैं और सेना ने 59 विद्रोहियों को पकड़ लिया है. दो सैनिकों की भी मौत हुई है.
भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में क़रीब 40 विभिन्न संगठन सक्रिय हैं जिनमें से कुछ के बारे में कहा जाता है कि वे पड़ोसी देशों को अपने अड्डे के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.