मंगलवार, 09 नवंबर, 2004 को 05:19 GMT तक के समाचार
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि कुछ देशों में मलेरिया की दवाइयों की कमी पड़ सकती है क्योंकि इन दवाइयों की मांग बहुत बढ़ गई है.
एक चीनी पौधे से मलेरिया की दवाई बनती है जो मलेरिया की भयंकर स्थिति में भी रोगी को बचा सकती है.
संगठन का कहना है कि क़रीब 40 देश आरटेमिसिनिन से बनी दवाई का इस्तेमाल करते हैं और अगले साल मार्च तक इसकी आपूर्ति में समस्या हो सकती है.
डब्ल्यूएचओ के अनुसार मलेरिया को रोकने वाली दूसरी दवाईयां उपलब्ध कराई जाएंगी. असली समस्या पौधों से जुड़ी हुई है. जिस पौधे से आरटेमिसिनिन निकलती है उसे बढ़ने में छह महीने लगते हैं और उसके बाद दवा बनाने में और छह महीने का समय लगता है.
दो तीन साल पहले दवाईयों की दिक्कत नहीं थी क्योंकि मलेरिया की इस रामबाण दवा के लिए दो लाख के क़रीब आर्डर आते थे लेकिन मांग अचानक बढ़ गई है.
अब अचानक एक करोड़ दवाईयों की मांग आ रही है जिसके अगले साल तक छह करोड़ होने की संभावना है.
यह दवाई नोवारटिस नामक कंपनी बनाती है और कंपनी का कहना है कि चीन से इस मांग को पूरा करने के लिए पौधों की आपूर्ति जल्दी होनी मुश्किल है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वादा किया है कि अगर किसी देश में दवाओं की कमी पड़ी तो वे उसे दूर करने का प्रयास करेंगे लेकिन साथ ही उन्होंने कहा है कि मलेरिया के इलाज के लिए कुनैन जैसी अन्य दवाइयों का इंतज़ाम किया जाए.