उत्तरप्रदेश में एक अदालती आदेश के बाद भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी पर बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक मामला चलाए जाने की संभावना बढ़ गई है.
अदालत ने कहा है कि पहले के उस आदेश की समीक्षा की जानी चाहिए जिसमें आडवाणी को बरी कर दिया गया था.
आडवाणी पर अयोध्या में जमा हुई कट्टरपंथी हिंदुओं की भीड़ को उकसाने का आरोप था.
केंद्रीय जाँच ब्यूरो(सीबीआई) ने मामले की नए सिरे से समीक्षा के लिए अदालत से अपील की थी.
सीबीआई 1992 में मस्जिद ढहाए जाने की घटना से जुड़े केस में बरी किए गए अन्य लोगों के मामले की समीक्षा कराए जाने की अपील की है.
सीबीआई की याचिका
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ पीठ ने सीबीआई की याचिका को स्वीकार कर लिया है.
आडवाणी के मामले पर अदालती सुनवाई 16 दिसंबर को होगी.
संवाददाताओं के अनुसार यह स्पष्ट नहीं हो सका है आख़िर क्यों सीबीआई मामले की समीक्षा कराना चाहती है, वैसे लोग इसे केंद्र में सरकार बदलने से जोड़कर देखते हैं.
आडवाणी ने पिछले दिनों बीबीसी को एक इंटरव्यू में कहा था कि बाबरी विध्वंस से उन्हें बहुत दुख हुआ और यह विध्वंस नहीं होना चाहिए था.
उन्होंने कहा कि भाजपा अन्य विवादास्पद स्थलों पर मंदिर निर्माण के आंदोलन को समर्थन नहीं देगी.