रविवार, 31 अक्तूबर, 2004 को 05:59 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में बेरोज़गारी में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है और अनुमान के मुताबिक़ क़रीब 35 लाख मज़दूरों के पास कामकाज नहीं है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में बेरोज़गारी की दर दक्षिण एशिया में सबसे ख़राब दरों में से एक हो गई है और वहाँ इतनी कम संख्या में महिलाएँ काम करती हैं जो दक्षिण एशिया क्षेत्र में सबसे कम हैं.
यह रिपोर्ट उस सर्वेक्षण पर आधारित है जो सन 2000 और 2002 के बीच किया गया और यह पाकिस्तान स्टेट बैंक की वार्षिक समीक्षा का हिस्सा भी है.
रिपोर्ट कहती है कि बेरोज़गारी से सबसे ज़्यादा महिला वर्ग प्रभावित हुआ है और उनमें बेरोज़गारी पुरुषों के मुक़ाबले दोगुना है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया क्षेत्र रोज़गार के नज़रिए से सबसे ख़राब हालत पाकिस्तान में है और यह क्षेत्र के एक देश सिर्फ़ नेपाल से ही बेहतर कही जा सकती है.
सेंट्रल बैंक के गवर्नर डॉक्टर इशरत हुसैन ने 1990 में बेरोज़गारी की हालत का हवाला दिया है जब देश की आर्थिक वृद्धि दर चार प्रतिशत थी और निवेश भी कम ही था.
डॉक्टर इशरत हुसैन ने बीबीसी को बताया कि वह यह नहीं कहने की स्थिति में नहीं हैं कि सन 2002 के बाद से बेरोज़गारी बढ़ी है या नहीं. इसका पता लगाने के लिए एक और सर्वेक्षण की ज़रूरत होगी.
रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान में महँगाई यानी मुद्रा स्फीति की दर सरकार द्वारा निर्धारित पाँच प्रतिशत के आँकड़े को पार कर गई है और इस साल की पहली तिमाही में यह नौ प्रतिशत तक पहुँच गई.
बैंक का कहना है कि खाने-पीने की चीज़ें तो और ज़्यादा महंगी हो गई हैं और उनकी महंगाई की दर 13.4 प्रतिशत दर्ज की गई है.
बैंक के अनुसार देश में निरक्षरता की वजह से भी मानव विकास कम हुआ है. पाकिस्तान के क़रीब छह करोड़ 84 लाख लोग अनपढ़ हैं.
सेंट्रल बैंक ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था में प्रगति तो हो रही है लेकिन आगाह भी किया कि तेल की बढ़ती क़ीमतों की वजह से देश का निर्यात प्रभावित हो सकता है.
रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया गया है कि देश की अच्छी 18.1 प्रतिशत औद्योगिक वृद्धि दर से कुल विकास दर के 6.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद की जा सकती है.