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बुधवार, 27 अक्तूबर, 2004 को 17:27 GMT तक के समाचार

महाराष्ट्र में गतिरोध ख़त्म

ग्यारह दिनों की खींचतान के बाद आख़िर राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी)ने महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री पद पाने की ज़िद छोड़ दी, इसके बदले में पार्टी को अधिक मंत्री पद दिए जाने पर समझौता हुआ है.

दिल्ली में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के बीच हुई मुलाक़ात के बाद यह समझौता हुआ, बाद में शरद पवार ने भी सोनिया गाँधी से फ़ोन पर बातचीत करके इस समझौते पर मुहर लगा दी.

प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि पिछली सरकार की ही तरह एनसीपी का एक नेता उप मुख्यमंत्री होगा जबकि इस बार पिछली सरकार के मुक़ाबले एनसीपी को दो मंत्री पद अधिक मिलेंगे.

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मारग्रेट अल्वा ने कहा, "हमने दोनों पक्षों की सहमति से मामला सुलझा लिया है, इस बार एनसीपी को दो अतिरिक्त मंत्री पद मिलेंगे और इसके अलावा दो नए मंत्रालय भी एनसीपी के खाते में जाएँगे."

दिल्ली से बीबीसी संवाददाता सीमा चिश्ती ने बताया है कि अभी तक मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन निवर्तमान मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे के नाम पर किसी को कोई आपत्ति नहीं दिखाई दे रही इसलिए पद पर उनके बने रहने के आसार अधिक हैं.

कांग्रेस पार्टी के महासचिव अहमद पटेल ने मुख्यमंत्री तय होने में देरी के लिए महाराष्ट्र की जनता से माफ़ी माँगी और कहा कि वे राज्य में एक स्थायी सरकार देने का वादा करते हैं.

तकरार

288 सदस्यों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में 71 सीटें जीतकर एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है जबकि कांग्रेस को 69 सीटें हासिल हुई थीं.

कांग्रेस पार्टी का कहना था कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ उनका चुनाव पूर्व तालमेल हुआ था इसलिए उसके तीन विधायकों को भी कांग्रेस की ही सूची में गिनना चाहिए.

दूसरी ओर, शरद पवार का कहना है कि 1999 के फार्मूले पर अमल होना चाहिए जिसके तहत मुख्यमंत्री अधिक विधायकों वाले दल से बनना चाहिए.

1999 के चुनाव में कांग्रेस ने अधिक सीटें जीती थीं और एनसीपी ने उप मुख्यमंत्री पद से संतोष कर लिया था जबकि कांग्रेस को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली थी.