मंगलवार, 19 अक्तूबर, 2004 को 11:19 GMT तक के समाचार
चेन्नई से सुनील रामन
बीबीसी संवाददाता
कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन और उनके तीन साथियों के शव देखने के लिए मंगलवार को धर्मपुरी के ज़िला अस्पताल में हज़ारों लोग इकट्ठे हो गए.
प्रशासन ने ज़िला अस्पताल में कतार लगवाकर उनको देखने का इंतज़ाम किया.
पोस्टमार्टम के बाद चारों शवों को उनके परिवारजनों को सौंपने की औपचारिकताएँ पूरी की जा रही हैं.
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर धर्मपुरी ज़िले के पप्परापट्टी गाँव में सोमवार की रात एक मुठभेड़ में स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) ने वीरप्पन और उनके तीन साथियों सेतुगुड़ी गोविंदन, चंद्रेगौड़ा और सेतुमणि को मार दिया था.
अंत्येष्टि की तैयारियाँ
बीबीसी से हुई बातचीत में धर्मपुरी के ज़िलाधीश आशीष वाछानी ने बताया कि वीरप्पन का शव उसके परिवार के हवाले कर दिया जाएगा.
उन्होंने बताया कि वीरप्पन की पत्नी और गोविंदन के परिवार वाले वहाँ पहुँच चुके हैं. शेष दो साथियों के परिवार वाले देर तक वहाँ नहीं पहुँचे थे.
वाछानी ने कहा कि हर शव के साथ पुलिस अधीक्षक स्तर का एक अधिकारी भेजा जाएगा और प्रशासन की ओर से सुरक्षा-व्यवस्था चौकस रखी जाएगी.
जो लोग वीरप्पन और साथियों को देखने के लिए आए उनमें ज़्यादातर आसपास के इलाक़े के लोग थे.
इनमें से कुछ लोग वीरप्पन के प्रशंसक भी थे.
ज़्यादातर लोगों को लगता है कि जिस तरह से मुठभेड़ में वीरप्पन और उनके साथियों को मारा गया है वह ग़लत है.
एक पूर्व सैनिक ने कहा,"हम लोकतंत्र में रह रहे हैं और वीरप्पन चाहे जितना बुरा रहा हो उसे इस तरह मारना ठीक नहीं था उसे ज़िंदा पकड़ना चाहिए था."
वीरप्पन के शव को देखने आए रवि ने कहा, "वीरप्पन ग़रीब लोगों को मदद करते थे उन्हें इस तरह मार देना ग़लत है."
अभी यह पता नहीं है कि वीरप्पन का शव लेकर उनके परिवारजन कहाँ अंतिम संस्कार करेंगे.
एसटीएफ़ का पक्ष
![]() तमिलनाडु एसटीएफ़ प्रमुख के. विजय कुमार की जयजयकार |
एक तरफ़ यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या वीरप्पन और उनके साथी सचमुच किसी मुठभेड़ में मारे गए हैं. दूसरी ओर स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) का कहना है कि यह योजनाबद्ध कार्रवाई का हिस्सा था.
एसटीएफ़ के प्रमुख विजय कुमार का कहना है कि इस कार्रवाई का नाम 'ऑपरेशन ककून' था.
उन्होंने बताया कि ख़ुफ़िया सूत्रों से मिली सूचना के आधार पर इसकी योजना बनाई गई थी.
उनका कहना है कि जिस एंबुलेंस में वीरप्पन को ले जाया जा रहा था वह भी एसटीएफ़ की थी और उसका ड्राइवर भी एसटीएफ़ का सिपाही था.