मंगलवार, 19 अक्तूबर, 2004 को 03:27 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में अदालत ने एक मुसलमान व्यक्ति को ईशनिंदा के जुर्म में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.
छत्तीस वर्षीय मेंहदी हसन पर क़ुरानशरीफ़ को जलाने का आरोप था जिसे पाकिस्तान के क़ानून के तहत दंडनीय अपराध माना जाता है.
निचली अदालत के जज अनवर चौधरी ने कहा कि जुर्म साबित हो चुका है और मेंहदी हसन को उम्रकैद की सज़ा दी जा रही है.
पाकिस्तान के क़ानूनों के मुताबिक़ इस्लाम, रसूल या क़ुरान की तौहीन करने वाले व्यक्ति को मौत की सज़ा दी जा सकती है.
मेंहदी हसन को दिसंबर 2001 में गिरफ़्तार किया गया था, लाहौर में रहने वाले हसन की शिकायत नगर पालिका के एक सदस्य ने की थी.
नगर पालिका सदस्य मोहम्मद ज़ुबैर ने पुलिस में शिकायत की थी कि हसन ने अपने घर के आँगन में कुरान की एक प्रति को जलाया था.
हसन ने इस मामले में अपने आप को बेकसूर बताया था, हसन के वकील का कहना है कि ज़ायदाद के एक विवाद के कारण कुछ लोगों ने उसे साज़िश के तहत इस मामले में फँसाया है.
हसन के वकील ने कहा है कि वे इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे.
पाकिस्तान के ईशनिंदा की क़ानून की मानवाधिकार संगठन आलोचना करते रहे हैं, उनका कहना है कि इस क़ानून का बहुत आसानी से दुरूपयोग हो सकता है क्योंकि यह साबित करना अभियुक्त की ज़िम्मेदारी हो जाती है कि वह निर्दोष है.
ईशनिंदा के मामले में किसी सबूत की ज़रूरत नहीं समझी जाती, किसी गवाह का बयान देना काफ़ी माना जाता है.
इस क़ानून के तहत पाकिस्तान की जेल में सैकड़ों लोग बंद हैं और देश के ईसाई संगठनों का आरोप रहा है कि उन्हें इस क़ानून का सहारा लेकर सताया जाता है.