गुरुवार, 14 अक्तूबर, 2004 को 08:09 GMT तक के समाचार
पाकिस्तानी संसद के निचले सदन नेशनल एसेंबली ने उस विधेयक को मंज़ूरी दे दी है जिसमें व्यवस्था है कि परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्राध्यक्ष और सेनाध्यक्ष दोनों ही पदों पर बने रहेंगे.
इस क़ानून के मुताबिक़ राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ इन दोनों पदों पर सन 2007 तक बने रहेंगे.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने पिछले साल वादा किया था कि दिसंबर 2004 में वह सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे.
विपक्षी सांसदों का आरोप है कि यह क़ानून परवेज़ मुशर्रफ़ को बहुत ज़्यादा अधिकार देता है.
संसद में यह विधेयक भारी बहुमत से पारित हुआ हालाँकि विपक्षी सदस्यों ने विरोधस्वरूप कार्यवाही में कुछ बाधा पहुँचाने की नाकाम कोशिश की.
इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि इस विधेयक को व्यापक बहस के बिना ही पारित कराने के सरकार के क़दम पर कोई आश्चर्य नहीं व्यक्त किया जा रहा है.
परवेज़ मुशर्रफ़ पहले ही यह संकेत दे चुके थे कि वह दोनों पद अपने ही पास रखना चाहते हैं.
संकेत
प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ ने भी कहा था कि देश के मौजूदा हालात और प्रगति के लिए दोनों पद परवेज़ मुशर्रफ़ के पास रहना ही बेहतर है.
हालाँकि अभी इस विधेयक को क़ानून बनने से पहले ऊपरी सदन की भी मंज़ूरी मिलनी है लेकिन जानकारों का कहना है कि वह सिर्फ़ एक औपचारिकता मात्र होगी.
ग़ौरतलब है कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ अक्तूबर 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की सरकार का तख़्ता पलटने के बाद सत्ता में आए थे.
बाद में वह देश के राष्ट्रपति भी चुने गए थे. यह साल परवेज़ मुशर्रफ़ के सत्ता में आने का पाँचवाँ साल है.
परवेज़ मुशर्रफ़ के समर्थक पिछले कुछ सप्ताहों से इस विधेयक के समर्थन में अभियान चला रहे थे और उनका कहना है कि यह ज़रूरी है कि परवेज़ मुशर्रफ़ सेना की वर्दी ना छोड़ें.
उनका कहना है कि पाकिस्तान के सुरक्षा हालात को देखते हुए इस समय एक मज़बूत नेता की ज़रूरत है, ख़ासतौर से अल क़ायदा के ख़िलाफ़ चलाए जा रहे अभियानों के हालात में.
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने भी हाल ही में कहा था कि देश के क़रीब 96 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि वह राष्ट्राध्यक्ष और सेनाध्यक्ष दोनों ही पदों पर भी बने रहें लेकिन विपक्षी दल इस वादे को ख़ारिज करते हैं.
विपक्षी और धार्मिक दलों ने नए विधेयक को भी असंवैधानिक बताया है.