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गुरुवार, 14 अक्तूबर, 2004 को 15:01 GMT तक के समाचार

पीपुल्स वार और एमसीसी साथ-साथ

भारत में दो माओवादी गुटों पीपुल्स वार ग्रुप (पीडब्ल्यूजी) और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) ने हाथ मिलाकर एक नए संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) का गठन किया है.

इन दोनों गुटों के गुरिल्ला लड़ाकों का भी आपस में विलय हो गया है. इन दोनों संगठनों के नेताओं का कहना है कि वे सभी असली माओवादी पार्टियों और नेताओं को नए दल के बैनर तले लाना चाहते हैं.

पीपुल्स वार ग्रुप और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर के नेताओं की ओर से जारी संयुक्त बयान में नए संगठन की प्राथमिकता बताई गई है.

बयान में कहा गया है कि संगठन का पहला लक्ष्य और कार्यक्रम विश्व मज़दूर क्रांति के तहत भारत में पहले से ही चल रही नई लोकतांत्रिक क्रांति को आगे बढ़ाना और पूरा करना है.

नेताओं के संयुक्त बयान में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ बातचीत के बारे में कुछ नहीं कहा गया है.

बयान

बयान में यह ज़रूर कहा गया है कि नए संगठन की प्राथमिकता दोनों गुटों के गुरिल्ला लड़ाकों को मिलाकर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का गठन और गुरिल्ला ज़ोन को उनके ठिकाने के रूप में विकसित करना है.

नए संगठन ने जातीय गुरिल्ला आंदोलन का भी समर्थन करने की बात कही है. संगठन ने नेपाल में चल रहे पीपुल्स वार ग्रुप के आंदोलन के प्रति भी अपना समर्थन व्यक्त किया है.

नए संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह नेपाल में माओवादी आंदोलन में भारत और अमरीकी हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ है.

पीपुल्स वार ग्रुप के महासचिव गणपति को नए संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) का महासचिव बनाया गया है.

नए संगठन के नेताओं ने कहा है कि वे भारत के श्रमजीवी वर्ग के आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे.

दबदबा

आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, मध्य प्रदेश और बिहार में पीपुल्स वार ग्रुप का भारी प्रभाव है.

जबकि माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर का बिहार में दबदबा है. पश्चिम बंगाल के भी कुछ इलाकों में दोनों संगठनों का प्रभाव माना जाता है.

भारत सरकार माओवादी संगठनों के बढ़ते प्रभाव से पहले से ही चिंतित है.

हाल ही में गृह मंत्रालय ने माओवादी विद्रोहियों के प्रभाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी और उनसे मिल-जुलकर कार्रवाई करने की बात कही थी.

पीपुल्स वार ग्रुप की प्रदेश समिति के प्रमुख अक्कीराजू हरगोपाल ने कहा है कि सरकार के साथ बातचीत कुछ दिनों से चल रही है और इस बारे में आख़िरी फ़ैसला दोनों संगठनों की केंद्रीय समिति करेगी.

उन्होंने कहा कि दोनों संगठनों का विलय दबे-कुचले जा रहे लोगों के लिए अच्छी ख़बर है और सत्ताधारी वर्ग के बुरी.