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अफ़ग़ानिस्तान में मतगणना शुरू हुई

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के लिए मतगणना गुरूवार को आख़िरकार शुरू हो गई.

शनिवार को मत डाले गए थे लेकिन कुछ उम्मीदवारों ने मतदान के दौरान गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए बहिष्कार का ऐलान किया था.

हामिद करज़ई को चुनौती देने वाले 18 उम्मीदवारों में से 15 ने मतदान में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए उसका बहिष्कार करने की घोषणा कर दी थी.

जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र का एक दल कथित अनियमितताओं के आरोपों की जाँच कर रहा है.

जिन मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे वहाँ की मतपेटियों को अलग कर लिया गया है और उनकी जाँच की जा रही है.

मतगणना स्थानीय समय के अनुसार प्रातः नौ बजे शुरू हुई और संभावना व्यक्त की गई है कि कुछ नतीजे गुरूवार को ही आने शुरू हो जाएंगे लेकिन अंतिम नतीजे आने में कई सप्ताह का समय लग सकता है.

अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति पद के लिए पहली बार हुए चुनावों को वैसे तो एक बड़ी कामयाबी बताया जा रहा है लेकिन गड़बड़ी के आरोपों ने ध्यान बदल दिया है.

उसके बाद हामिद करज़ई को चुनौती देने वाले एक प्रमुख उम्मीदवार अब्दुल रशीद दोस्तम ने बुधवार को फ़ैसला किया कि वह चुनाव प्रक्रिया का विरोध नहीं करेंगे.

विवाद की शुरूआत ऊँगली पर निशान लगाने वाली स्याही से शुरू हुई, कई लोगों ने शिकायत की कि स्याही का निशान पक्का नहीं था इसलिए लोग दोबारा-तिबारा वोट डाल रहे थे.

दोस्तम से पहले करज़ई को कड़ी चुनौती देने वाले यूनुस क़ानूनी के विरोध समाप्त कर देने के बाद से लगने लगा था कि मामला दुरुस्त हो जाएगा.

जाँच

इस बीच तीन सदस्यों वाला एक दल मतदान के दौरान गड़बड़ी के आरोपों की जाँच कर रहा है. इस दल को संयुक्त राष्ट्र और अफ़ग़ानिस्तान चुनाव प्रबंधन संस्था ने नियुक्त किया है.

इस दल के एक सदस्य क्रेग जेनेस ने बताया कि 18 उम्मीदवारों ने क़रीब 43 शिकायतें दर्ज की हैं जिनमें से 37 पर विचार किया गया है.

उन्होंने बताया कि शिकायतों की समीक्षा के बाद दस मतदान केंद्रों की मतपेटियों को अलग करके उनकी जाँच की जा रही है. उम्मीदवारों को अपनी शिकायतों दर्ज कराने के लिए गुरूवार तक का समय दिया गया है.

काबुल में बीबीसी संवाददाता एंड्रयू नोर्द का कहना है कि ऐसे पर्याप्त सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि बहुत से मतदाताओं ने एक ज़्यादा बार मतदान किया.

एंड्रयू नोर्द का कहना है कि जाँच के लिए संयुक्त राष्ट्र दल का गठन भी विवादों में रहा है क्योंकि इसका एक भी सदस्य अफ़ग़ानी नहीं है.