शुक्रवार, 08 अक्तूबर, 2004 को 13:41 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के मुल्तान शहर में गुरुवार तड़के हुए कार बम धमाके के बाद शुक्रवार को सुन्नी मुसलमानों ने विरोध प्रदर्शन किया.
इस बीच सरकार ने मस्जिद में नमाज़ के लिए इकट्ठा होने के अलावा राजनीतिक और धार्मिक सभाओं पर पाबंदी लगा दी है.
हालाँकि उस कार धमाके के बाद शहर में सभाएँ करने पर रोक लगा दी गई थी लेकिन प्रदर्शनकारियों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन करके कुछ जगह टायर जलाए.
प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर अवरोधक लगाए और शिया मुसलमानों के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी भी की.
गुरूवार को एक कार के ज़रिए हुए बम धमाके में 40 लोग मारे गए थे और 100 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे.
पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री चौधरी परवेज़ इलाही ने गुरूवार को हुए हमले के पीछे जिन लोगों का हाथ है उनके बारे में किसी भी सूचना के लिए एक करोड़ रुपए (पाकिस्तानी) के ईनाम की घोषणा की है.
पाकिस्तानी पुलिस ने कहा है कि उन्होंने मुल्तान और फ़ैसलाबाद शहरों में दर्जन भर शिया कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार किया है और कुछ और छापे मारे जा रहे हैं.
पाकिस्तान में शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच हिंसा काफ़ी अरसे से चली आ रही है. पाकिस्तान में क़रीब 80 प्रतिशत आबादी सुन्नी मुसलमानों की है.
चौकसी और पाबंदी
ख़ासतौर से जुमे की नमाज़ को देखते हुए पूरे देश में कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए और सेना और पुलिस को उच्च सतर्कता पर रखा गया.
बीबीसी संवाददाता शाहिद मलिक ने मुल्तान में कहा कि प्रदर्शनकारियों ने शहर के रशीदाबाद इलाक़े में जुलूस निकाला.
एक प्रदर्शनकारी मोहम्मद क़ासिम ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "हम शांतिपूर्ण लोग हैं लेकिन अगर हमारे लोगों के हत्यारों को एक सप्ताह के भीतर गिरफ़्तार नहीं किया जाता है तो हम ख़ामोश नहीं बैठेंगे. हम जानते हैं कि शियाओं ने हमारे लोगों को मारा है."
मुल्तान में स्कूल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान शुक्रवार को दूसरे दिन भी बंद रहे.
पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा मंत्री आफ़ताब ख़ान शेरपाओ ने कहा है कि राजनीतिक रैलियों और धार्मिक सभाओं पर पाबंदी को लागू करने के लिए प्रांतीय सरकारों को भी सख़्त हिदायतें दी गई हैं.
उन्होंने कहा, "सरकार ने तमाम सुरक्षा अमले को उच्च सतर्कता बरतने को कहा है क्योंकि कुछ तत्व देश को आतंकवादी गतिविधियों के ज़रिए अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं."
पंजाब के मुख्यमंत्री चौधरी परवेज़ इलाही ने कहा है कि मुल्तान के प्रशासनिक अधिकारियों से यह तलब किया जा रहा है कि एक प्रतिबंधित संगठन को इस तरह का जलसा और इतनी देर तक आयोजित करने की इजाज़त क्यों दी गई.
ग़ौरतलब है कि प्रतिबंधित संगठन सिपह-ए-सहाबा ने अपने नेता मौलाना आज़म तारिक़ की मौत की पहली बरसी के मौक़े पर एक जलसा आयोजित किया था जो गुरूवार तड़के तक जारी था और तभी उस पर कार बम धमाका किया गया.