गुरुवार, 07 अक्तूबर, 2004 को 07:48 GMT तक के समाचार
महाराष्ट्र से नागेंदर शर्मा
बीबीसी संवाददाता
केंद्र सरकार में कथित दागी मंत्रियों के ख़िलाफ़ आक्रमाक रणनीति अपनाने वाले भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में इस मामले पर रक्षात्मक रवैया अपनाना पड़ रहा है.
इसका कारण है राज्य के 15 प्रतिष्ठित नागरिकों की अगुवाई में बना ग़ैरसरकारी संस्थाओं का समूह 'महाराष्ट्र इलेक्शन वाच'.
इस समूह में मुंबई उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर धर्माधिकारी, राज्य के पूर्व पुलिस प्रमुख जूलिओ रिबेरो और भारत सरकार के पूर्व केबिनेट सचिव बीजी देशमुख शामिल हैं.
'महाराष्ट्र इलेक्शन वाच' ने सभी मान्यता प्राप्त दलों के उम्मीदवारों द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष पेश किए गए शपथपत्रों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है.
इसके अनुसार भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची देखें तो कुल 555 उम्मीदवारों में से 197 ऐसे हैं जिनके ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हैं.
शिवसेना-भाजपा आगे
इस रिपोर्ट से विभिन्न दलों के उम्मीदवारों के बारे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.
इस रिपोर्ट के जारी होने से सबसे ज्यादा परेशानी शिवसेना-भाजपा गठबंधन को हुई है.
शिवसेना के 163 में से 91 उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले. दर्ज हैं जबकि भाजपा के 111 में से 45 उम्मीदवार इसी श्रेणी में आते हैं.
दूसरी तरफ कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस गठबंधन में भी ऐसे उम्मीदवार हैं लेकिन उनकी संख्या शिवसेना-भाजपा के मुकाबले आधी है.
राष्ट्रवादी कांग्रेस के 124 में 31 और कांग्रेस के 157 में से 30 उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले चल रहे हैं.
इस रिपोर्ट के बारें में न्यायमूर्ति धर्माधिकारी ने बीबीसी को बताया “इसमें हमने मात्र उन्हीं उम्मीदवारों का ज़िक्र किया है जिनके खिलाफ अदालतों में आरोप पत्र दायर किये जा चुके हैं. जनता को यह जानने का अधिकार है कि जिनको वो वोट दे रही है उनका चरित्र कैसा है”.
रिपोर्ट स्वीकार नहीं
शिवसेना-भाजपा गठबंधन ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है.
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा “ये आप लोगों के आंकड़े हैं. लालू यादव जैसे हत्या और भ्रष्टाचार में लिप्त होने वाले मामलों की तुलना राजनैतिक मामलों से कैसे कि जा सकती है. जनता के हित के लिये चलाए गए आंदोलनों में यदि नेताओं पर मुकदमे दायर किये जाते हैं तो उन्हें आपराधिक नहीं कहा जा सकता.”
इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चुनाव लड़ रहे 200 उम्मीदवार करोड़पति हैं और अधिकतर उम्मीदवारों ने आयकर विभाग द्वारा दिया गया व्यक्तिगत स्थायी अकाउंट नंबर (पैन) सार्वजनिक नहीं किया है.
विभिन्न राजनीतिक दलों के 200 से अधिक उम्मीदवार ऐसे है जो जिस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे है वो वहां नहीं रहते, यानी राजनीति की भाषा में बाहरी हैं.