रविवार, 26 सितंबर, 2004 को 08:16 GMT तक के समाचार
सलीम रिज़वी
न्यूयॉर्क से
भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने प्रवासी भारतीयों से अपील की है कि वे अपनी मातृभूमि की प्रगति में बढ़चढ़कर सहयोग दें.
मनमोहन सिंह ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक व्यस्तता के बाद समय निकाल कर अमरीका में रहने वाले भारतीय समुदाय से भी मुलाक़ात की.
न्यूयॉर्क के लिंकन सेंटर में हज़ारों की संख्या में आए लोग प्रधानमंत्री से मिलने के लिए आतुर नज़र आए. दूरदराज़ के इलाक़ों से भी आए लोगों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे.
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की अमरीका इकाई इंडियन नेशनल ओवरसीज़ कांग्रेस ने इस समारोह का आयोज किया था.
इस मौक़े पर बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया और अमरीकी और भारतीय राष्ट्र गान भी गाया गया.
तालियों की गूँज के बीच मनमोहन सिंह ने भारतीय समुदाय की कामयाबी की तारीफ़ करते हुए उन्हें बधाई दी और कहा कि भारतीय समुदाय ने अमरीका में बहुत कम समय में अपना एक ख़ास मुक़ाम बना लिया है.
उन्होंने कहा, "आपसे यहाँ मिलकर मुझे इस बात का यक़ीन हो गया है कि हम भारतीय दुनिया में किसी से भी पीछे नहीं हैं."
"मेरी सरकार के सामने ये भी चुनौती है कि हम इसी तरह का माहौल अपने देश में पैदा करें जिससे वहाँ पर भी भारतीयों की प्रतिभा खुलकर पूरे तौर पर निखर सके और देश की प्रगति में मदद करे."
प्रवासी होने का अहसास
मनमोहन सिंह ने अपने निजी तजुर्बे का हवाला देते कहा कि उन्हें घर छोड़ने के दर्द का अहसास है.
"मुझे आपके प्रवासी होने के अहसास का अंदाज़ा है क्योंकि मैं भी इस मानसिकता से गुज़र चुका हूँ जब मेरे परिवार को पाकिस्तान में अपना घर छोड़कर आना पड़ा था और उसके बाद हमें कड़ी मेहनत और उम्मीद के साथ अपनी ज़िंदगी आगे बढ़ानी पड़ी थी, ऐसे समय में जब भविष्य बहुत धुँधला नज़र आ रहा था."
प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय से अपील की कि वो अपनी मातृभूमि में अब ज़्यादा से ज़्यादा शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग करें.
डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भारतीय समुदाय को प्रवासी मामलों का नया मंत्रालय बनाए जाने का हवाला दिया और कहा कि अब दोहरी नागरिकता के बारे में भी जल्दी ही क़दम उठाए जाएंगे.
अमरीका के साथ आर्थिक सहयोग और आतंकवाद ख़त्म करने का संकल्प दोहराते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रहेगी लेकिन साथ ही लोकतंत्र के उसूलों को भी नहीं भुलाया जाएगा.
इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री की पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ भी मुलाक़ात हुई थी.
दोनों नेताओं के साझा बयान में सीमा पार से आतंकवाद के बारे में किसी तरह का ज़िक्र नहीं होने से क़यास लगाए जाने लगे थे कि भारत ने शायद इस मुद्दे को बातचीत में नहीं उठाया.
लेकिन बाद में एक पत्रकार सम्मेलन में मनमोहन सिंह ने यह साफ़ किया कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति के साथ बातचीत में उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था.
प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि पाकिस्तान के साथ किसी तरह की बातचीत का मुद्दा हमेशा यही रहेगा कि सीमा पार से आतंकवाद रोका जाए और उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान परवेज़ मुशर्रफ़ ने भी इस बात को माना.
लेकिन साझा बयान में इस तरह के ज़िक्र नहीं होने से एक भ्रम की स्थिति ज़रूर पैदा हो गई.