शनिवार, 25 सितंबर, 2004 को 17:51 GMT तक के समाचार
उनका नाम है मौरीन लाइन्स लेकिन स्थानीय लोग उन्हें बीबी दाउ कहते हैं.
पिछले 20 सालों से पाकिस्तान के उत्तर में दूरदराज़ के इलाक़े कलास घाटी में ये ब्रिटिश नागरिक मौरीन समाज सेवा कर रही हैं.
लेकिन बीस साल समाज सेवा करने के बाद अब ही उन्हें पाकिस्तान की नागरिकता दी गई है.
मौरीन 1985 से चितराल और कलास घाटियों में ग़ैर-मुसलमान समुदाय के साथ काम कर रही हैं.
विनम्र स्वभाव की मौरीन ने पाकिस्तान की इन्हीं पहाड़ियों को अपना घर बना लिया है.
चार साल पहले मौरीन की मां का देहांत हो गया और उसके बाद उनका ब्रिटेन से संपर्क ही टूट गया.
मौरीन ने बीबीसी से कहा, "मैने लंदन का अपना घर भी बेच दिया और पूरी तरह पाकिस्तान की हो गई. मुझे यहीं काम करना है. कलास घाटी के 60 लोग ही मेरा परिवार हैं और मेरा दिल यहीं बसता है."
स्थानीय लोगों में इज़्ज़त
एक स्थानीय अख़बार ने मौरीन के पाकिस्तानी नागरिकता दिए जाने का स्वागत किया और उनकी तुलना मदर टेरीसा से की.
चितराल के स्थानीय पत्रकार गुल हमद फारुकी कहते हैं, "स्थानीय लोग मौरीन की बड़ी इज़्जत करते हैं इसलिए उन्हें बीबी दाउ के नाम से बुलाते हैं."
मौरीन कहती हैं, "मैने ही ये नाम चुना क्योंकि ये मुझे अच्छा लगता है. बोलने में भी यह आसान है."
बीस सालों में मौरीन कश्मीरी और पश्तो भाषाएँ बोलना भी सीख गयी हैं.
उनकी उम्र 50 से ज़्यादा ऊपर है और वो कलास एन्वायरमेंटल प्रोटेक्शन सोसायटी ( केईपीएस) और हिंदुकुश संरक्षण संगठन (एचकेसीए ) की प्रमुख भी हैं.
मौरीन ने कलास की संस्कृति पर 'हिंदुकुश के काफिर कलास' और 'रोड टू जलालाबाद' नामक किताबें लिखी हैं.
धमकियाँ और परेशानी
लेकिन कुछ लोग उनके दुश्मन भी हो गए हैं.
कई बार मौरीन को चितराल से निकाले जाने की धमकी मिली और अधिकारियों ने यहाँ तक कहा कि चितराल से भागना उनके हित में होगा.
कुछ धार्मिक संगठन मौरीन पर आरोप लगाते हैं कि वो कलास के लोगों का धर्म परिवर्तन कर उन्हें ईसाई बना रही हैं.
मौरीन इन आरोपों का खंडन करती हैं.
उनका कहना है, "मेरे काम से मुस्लिमों और ईसाईयों दोनों को फ़ायदा हुआ है."
मौरीन के अनुसार उन्हें सबसे अधिक पुलिस ने ही परेशान किया है.
मौरीन को उम्मीद है कि पाकिस्तानी नागरिकता मिलने के बाद पुलिस उन्हें परेशान करना बंद कर देगी.