बुधवार, 22 सितंबर, 2004 को 11:48 GMT तक के समाचार
राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने आतंकवाद निरोधक विवादास्पद कानून पोटा को निरस्त करने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है.
यह कानून दो साल पहले संसद पर हमले के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन या एनडीए सरकार ने बनाया था.
इस क़ानून के तहत सुरक्षा बलों को ये अधिकार मिले थे कि वो किसी को भी 30 दिनों तक अदालत में पेश किए बिना हवालात में रखकर पूछताछ कर सकते हैं.
पोटा को संसद में पारित करने के लिए एनडीए को काफी मेहनत करनी पडी थी क्योंकि कांग्रेस समेत कई अन्य दल इसका विरोध कर रहे थे.
इसे संसद के संयुक्त सत्र में पारित करवाया गया था.
'दुरुपयोग'
पोटा के तहत देश भर में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया.
ऐसे भी आरोप लगे कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में राजनीतिक दलों ने पोटा का इस्तेमाल आपसी दुश्मनी निकालने के लिए किया.
गुजरात में दंगों के बाद कई मुसलमानों को भी पोटा के तहत जेलों में बंद कर दिया गया.
मानवाधिकार संगठनों ने इस क़ानून का कड़ा विरोध किया था.
लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने सत्ता में आने पर पोटा वापस करने का वादा किया था.
राष्ट्रपति ने आतंकवाद से निपटने के लिए मंगलवार को एक अन्य पुराने कानून में संशोधन को भी मंजूरी दी है.