सोमवार, 20 सितंबर, 2004 को 12:32 GMT तक के समाचार
अतुल संगर
लंदन से बीबीसी संवाददाता
ब्रिटेन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को स्थाई सदस्यता दिए जाने के दावे का समर्थन किया है.
भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों के बीच हुई मुलाक़ात के बाद जारी किए गए साझा बयान में दोनों देशों के बीच विभिन्न मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की वचनबद्धता जताई गई.
नौ दिनों की विदेश यात्रा पर निकले मनमोहन सिंह अपनी यात्रा के पहले चरण में ब्रिटेन पहुँचे जहाँ उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से मुलाक़ात की.
टोनी ब्लेयर ने भारतीय कश्मीर में जारी 'आतंकवादी हिंसा' की कड़े शब्दों में निंदा की और कहा कि आतंकवाद की रोकथाम के लिए ब्रिटेन और भारत मिल-जुलकर काम करेंगे.
प्रधानमंत्री ब्लेयर का कहना था कि भारत एक अरब से ज़्यादा लोगों का देश है और भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में न होना इस युग की वास्तविकता नहीं दर्शाता.
उन्होंने कहा कि इस बात में कोई शक नहीं कि हर साल भारत का स्थाई सदस्य बनाए जाने का दावा और मज़बूत हो रहा है.
पाकिस्तान के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत की पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ शांति प्रक्रिया के प्रति पूरी प्रतिबद्धता है.
उनका कहना था कि भारत-पाकिस्तान शांति वार्ता को तब तक आगे नहीं बढ़ाया जा सकता जब तक भारत में 'आतंकवादी तत्वों' के ख़तरे पर काबू नहीं पाया जाता.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता तो भारत में बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए जनता का समर्थन हालिस करना मुश्किल होगा.
अमरीका यात्रा
मनमोहन सिंह संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने के लिए अमरीका जा रहे हैं.
उन्हें 23 सितंबर को महासभा को संबोधित करना है.
अपनी अमरीका यात्रा के दौरान वे अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के अलाव कई अन्य देशों के नेताओं से भी मुलाक़ात करेंगे.
अमरीका में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से पहली बार मुलाकात करेंगे.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से भी मनमोहन सिंह पहली बार मिलेंगे.
भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की हाल की मुलाकात के बाद भारत-पाकिस्तान शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बातचीत हो सकती है.