बुधवार, 15 सितंबर, 2004 को 10:29 GMT तक के समाचार
गीता पांडे
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली में रहने वाले जिन लोगों के लिए देर तक ख़रीदारी करने की छूट बुधवार से शुरू हो गई है और अब दफ़्तरों में काम करने वालों को ज़रूरी चीज़ें ख़रीदने के लिए इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा.
दिल्ली सरकार ने फ़ैसला किया था कि दफ़्तरों में काम करने वालों को रोज़मर्रा का सामान ख़रीदने में दिक़्क़त होती थी क्योंकि जब तक वे दफ़्तर से घर पहुँचते थे तब तक मुख्य बाज़ार बंद हो जाते थे.
अब सरकार के नए आदेश के मुताबिक़ दिल्ली के बाज़ार और दुकानें रात ग्यारह बजे तक खुली रहेंगी.
इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को भी काफ़ी फ़ायदा होगा और देर रात तक चहल-पहल रहेगी.
एक पत्रिका ने कुछ दिन पहले देश के 30 राज्यों और पाँच केंद्र शासित प्रदेशों में सर्वेक्षण कराया था जिसमें दिल्ली को बाज़ार, सुविधाओं, बजट और समृद्धि की नज़र से सबसे बेहतर जगह बताया गया था.
दिल्ली के ज़्यादातर लोग इस फ़ैसले से ख़ुश हैं. एक छात्रा श्वेता का कहना था, "यह सचमुच बहुत अच्छा क़दम है. अब ख़रीदारी के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और दिल्ली में ही चीज़ें ख़रीद सकेंगे."
एक स्कूल अध्यापिक पूर्णिमा कपूर का ख़याल है कि देर तक बाज़ार खुलना उन लोगों के लिए एक वरदान है जो दफ़्तरों में शाम तक काम करते हैं.
"अब वे दफ़्तर से आने के बाद रात को भी ख़रीदारी कर सकेंगे."
चिंता भी है
दूसरी तरफ़ दुकान मालिक भी ख़ुश हैं क्योंकि इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी. अमित गुप्ता कनॉट प्लेस में एक दुकानदार हैं. वह कहते हैं, "आर्थिक उदारीकरण और उपभोक्तावाद के इस ज़माने में सिर्फ़ शाम सात बजे तक दुकानें खोलना पर्याप्त नहीं है."
"मेरे ख़याल में दिल्ली सरकार ने रात ग्यारह बजे तक बाज़ार और दुकानें खोलने का फ़ैसला करके बहुत अच्छा क़दम उठाया है."
अमित गुप्ता का कहना था कि वे ग्राहकों को लुभाने के लिए कुछ विशेष योजनाएँ शुरू करने जा रहे हैं.
असुरक्षा
लेकिन कुछ लोगों को यह चिंता भी है कि दिल्ली में महिलाओं के लिए शाम के बाद माहौल सुरक्षित नहीं है इसलिए देर तक ख़रीदारी की इजाज़त देना सही नहीं कहा जा सकता.
कनॉट प्लेस में कपड़े की एक दुकान में काम करने वाली मिनोती गुप्ता इस चिंता से ग्रस्त हैं.
"यह महिलाओं के लिए अच्छा क़दम नहीं है. हम शाम को आठ बजे तक काम करते हैं, बस यही समय ठीक है."
मिनोती गुप्ता कहती हैं कि दुकान से उनका घर काफ़ी दूर है और काम ख़त्म करने के बाद उनके बच्चे घर पर इंतज़ार करते हैं. अगर रात को ग्यारह बजे दुकान से छुट्टी मिलेगी तो घर पहुँचते-पहुँचते आधी रात हो जाएगी."
मिनोती गुप्ता के दुकान मालिक मनोज अग्रवाल कहते हैं कि दुकानों पर काम करने वाली महिलाओं को आधी रात तक घर पहुँचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
"हमने फ़ैसला किया है कि महिलाएँ सिर्फ़ रात आठ बजे तक ही काम करेंगी और उसके बाद सिर्फ़ पुरुष ही दुकान पर रहेंगे.
मनोज अग्रवाल यह भी कहते हैं कि अगर कोई महिला देर तक काम करना चाहती है तो हम उन्हें घर पहुँचाने का भी इंतज़ाम कर सकते हैं.