सोमवार, 06 सितंबर, 2004 को 12:55 GMT तक के समाचार
आकाश सोनी
बीबीसी हिंदी
करगिल युद्ध में मारे गए भारतीय सैनिकों की विधवाओं को न्याय दिलाने के लिए दायर की गई एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किए हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भेजकर पूछा है कि अब तक उन्हें वो राहत और मुआवज़ा क्यों नहीं मिला है जिसका उनसे वादा किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने ये नोटिस एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए जारी किए हैं.
इस याचिका के अनुसार करगिल की विधवाओं में से 40 प्रतिशत ऐसी हैं जिन्हें अब तक वो राहत नहीं मिली है जिसकी वो हक़दार हैं.
याचिका दायर करनेवाली ज्योत्सना द्विवेदी दिल्ली विश्वविद्यालय में एल एल बी अंतिम वर्ष की छात्रा हैं.
ज्योत्सना ने बीबीसी हिंदी सेवा से बातचीत में आरोप लगाया कि गाँवों और दूर-दराज़ के इलाक़ों से अपना हक़ पाने की इच्छुक कई विधवाओं को एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर लगवाए जा रहे हैं.
टालमटोल
कई विधवाओं को पिछले पाँच साल से किसी न किसी बहाने से टाला जा रहा है तो कुछ को मुआवज़ा न देने के अजीब कारण बताए जा रहे हैं.
एक महिला को ये बताया गया कि उनके पति करगिल के युद्ध में लड़े ज़रूर थे लेकिन उनकी मौत करगिल के बाहर हुई थी इसीलिए उन्हें मुआवज़ा नहीं दिया जा सकता.
याचिकाकर्ता ज्योत्सना द्विवेदी का कहना है, "इससे तीन तरह से नुकसान हो रहा है.
एक तो इन विधवाओं की माली हालत ख़राब है और वे ग़रीबी में ज़िंदगी बिताने के लिए मजबूर हैं.
दूसरे इनकी दुर्दशा देख सेना में काम कर रहे जवानों का मनोबल गिरता है और तीसरे यदि ऐसा ही चलता रहा तो लोग सेना में जाने से कतराएँगे."
सुप्रीम कोर्ट ने ज्योत्सना द्विवेदी को कहा है कि वो अपनी याचिका का दायरा बढ़ाएँ और कोशिश करें कि करगिल युद्ध ही नहीं सभी विधवाओं के मामले इसमें शामिल करें.
अब चार हफ़्तों में रक्षा मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार को अपना पक्ष रखना होगा.