शुक्रवार, 27 अगस्त, 2004 को 16:28 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़, वित्त मंत्री के रूप में अपनी योग्यता साबित कर चुके हैं अब देखना ये है कि वो अपने नई ज़िम्मेदारी कितनी कुशलता से निभाते हैं.
शौक़त अज़ीज़ सिटी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं और दुनिया की वित्तीय संस्थाओं में उनकी इज़्ज़त है.
जून के महीने में जब पूर्व प्रधानमंत्री मीर ज़फ़रुल्लाह ख़ान जमाली ने इस्तीफ़ा दिया तो सत्ताधारी पार्टी ने तुरंत घोषणा की कि शौक़त अज़ीज़ ये पद संभालेंगे.
लेकिन उससे पहले उनके लिए चुनाव लड़कर संसद में एक सीट हासिल करना ज़रूरी था. अगस्त 2004 के अंत में हुए उप चुनाव में वो सफल रहे और अब उनका रास्ता साफ़ हो गया है.
सफलताएँ
पचपन वर्षीय अज़ीज़ 1999 में जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के नेतृत्व में हुए तख़्तापलट के बाद उनकी सरकार में शामिल हुए थे.
उस समय पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुज़र रही थी. वित्त मंत्री का पद संभालने के बाद उन्होंने ऐसे क़दम उठाए कि अब देश की विकास दर 6.4 प्रतिशत बताई जाती है.
उन्हें यह सफलता इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने क़र्ज़ घटाए और अमरीका के नेतृत्व में आतंकवाद के ख़िलाफ़ शुरु किए गए अभियान में साथ देने की एवज़ में लाखों डॉलरों का क़र्ज़ और वित्तीय सहायता हासिल की.
लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में उनकी पहली ज़िम्मेदारी होगी सरकार का रोज़मर्रा का काम ठीक से चलाना और सरकारी नीतियों को प्रभावी रूप से लागू करना.
पेशेवर बैंकर
शौक़त अज़ीज़ का जन्म पाकिस्तान के कराची शहर में हुआ और वहीं वो पले-बढ़े. कराची विश्वविद्यालय से उन्होंने बिज़नेस ऐडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री हासिल की और 1969 में सिटी बैंक में काम करने लगे.
धीरे-धीरे उन्होंने तरक्की की और उन्हे न्यूयॉर्क के सिटी बैंक में एक वरिष्ठ पद पर बुला लिया गया.
शौक़त अज़ीज़ पाकिस्तान के शासक वर्ग के भले ही पसंदीदा व्यक्ति हों लेकिन उनका देश में कोई राजनीतिक आधार नहीं है.
उप चुनाव में वे सफल अवश्य हुए लेकिन बहुत से मतदाता उनसे बिल्कुल अपरिचित थे.
इसी चुनाव के लिए प्रचार करते हुए उन पर हमला हुआ था लेकिन वो बच गए. जबकि इस आत्मघाती बम हमले में उनका ड्राइवर और आठ अन्य लोग मारे गए.