बुधवार, 25 अगस्त, 2004 को 19:33 GMT तक के समाचार
भारत में सत्ताधारी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) और विपक्षी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ गई है.
एनडीए के वरिष्ठ नेताओं ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्होंने विपक्षी नेताओं का एक ज्ञापन स्वीकार न करके उनका अपमान किया है.
विपक्षी नेताओं ने लोकसभा में बजट प्रस्तावों को बिना बहस के पारित करने के अपने फ़ैसले पर भी पुनर्विचार करने की धमकी दी है.
'ज्ञापन मेज़ पर फेंका'
एनडीए का एक प्रतिनिधिमंडल बजट प्रस्तावों में विपक्ष की ओर से कुछ संशोधनों की सूची लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मिलने गया था.
इस प्रतिनिधिमंडल में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी भी मौजूद थे.
एनडीए के संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडिस ने आरोप लगाया, "प्रधानमंत्री ने हमारा ज्ञापन स्वीकार नहीं किया और उसे मेज़ पर फ़ेंक दिया. वे हमारे साथ बहुत गुस्से से पेश आए."
उधर काँग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद का कहना था, "जब विपक्ष किसी विषय पर सरकार को सहयोग देने के लिए तैयार ही नहीं है और सदन में प्रश्नकाल तक चलने नहीं दे रही तो सदन के बाहर ऐसा ज्ञापन देने का क्या मतलब है."
उन्होंने जॉर्ज फ़र्नांडिस के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने विपक्ष का ज्ञापन फेंका नहीं है केवल उसे लेने से इनकार किया है.