गोधरा रेल आगज़नी कांड के एक अभियुक्त ने अदालत से गुज़ारिश की है कि उन्हें एक महीने की अस्थायी ज़मानत पर रिहा किया जाए ताकि वे अपनी 'जिस्मानी ज़रूरतें' पूरी कर सकें.
फिरोज़ ख़ान पिछले तीस महीनों से अहमदाबाद के साबरमती सेंट्रल जेल में बंद हैं, उनका कहना है कि पत्नी के साथ शारीरिक संबंध क़ायम करने के लिए उन्हें जेल से बाहर जाने की अनुमति दी जाए.
फिरोज़ ख़ान ने अदालत में अर्ज़ी दाख़िल करके कहा है कि पत्नी से अलग रहने के कारण उन्हें काफ़ी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है.
उनके वकील का कहना है कि इस महीने के अंत में फिरोज़ ख़ान की अर्ज़ी पर सुनवाई होगी.
वकील के मुताबिक़, फिरोज़ ने अदालत से कहा है कि सेक्स के अभाव में उनकी पत्नी और वे, दोनों व्यक्ति काफ़ी तनावग्रस्त हैं.
फिरोज़ की दलील है कि इस्लाम धर्म में वैवाहिक रिश्ते के अलावा सेक्स की सख़्त मनाही है इसलिए अदालत को उनकी अपील पर विचार करना चाहिए.
उनका कहना है कि अदालत को 'मानवीय आधार पर' उनकी अर्ज़ी पर फ़ैसला करना चाहिए.
गोधरा कांड में कुल 95 लोग जेल में बंद हैं और इनके ख़िलाफ़ आतंकवाद विरोधी क़ानून के तहत आरोप लगाए गए हैं.
गोधरा रेल आगज़नी के बाद भड़के दंगों में कम से कम एक हज़ार लोग मारे गए थे जिनमें से अधिकतर मुसलमान थे.
गोधरा रेल आगज़नी कांड की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने फ़िलहाल रोक लगा दी है, रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इस कांड की जाँच के आदेश दिए हैं.
फिरोज़ ख़ान की अर्ज़ी को अपनी तरह की पहली अर्ज़ी माना जा रहा है और वकीलों का कहना है कि इससे पहले इस तरह की किसी याचिका का संदर्भ कहीं नहीं मिल रहा.
क़ानूनी मामलों के कुछ जानकारों का कहना है कि फिरोज़ ख़ान की अपील में क़ानूनी दृष्टि से बहुत दम नहीं है लेकिन इससे एक नई तरह की बहस ज़रूर छिड़ सकती है.