शुक्रवार, 20 अगस्त, 2004 को 17:46 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
अजमेर से
सियासत जब नरम पड़ती है तो सरहदों के बंधन भी ढीले पड़ जाते हैं. पाकिस्तान से महान सूफ़ी संत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की अजमेर स्थित दरगाह में इबादत करने पहुँचा 556 श्रद्धालुओं का एक दल इसी बात को दर्शाता है.
पाकिस्तान से अजमेर पहुँचा यह सबसे बड़ा पाकिस्तानी दल है.
अजमेर में इन दिनों सूफ़ी संत का 792वाँ उर्स चल रहा है, जहाँ 24 अगस्त को पाकिस्तान सरकार की ओर से मज़ार पर चादर चढ़ाकर दुआ माँगी जाएगी.
एक विशेष रेल गुरुवार को इन पाकिस्तानी तीर्थयात्रियों को लेकर जब अजमेर पहुँची तो श्रद्धालु भावुक हो गए. किसी ने पवित्र माटी को चूमा तो किसी की आँखों में इबादत के आँसू थे.
पाकिस्तानी दल के उपनेता लाहौर की दरगाह हजरत दाता गंज बक्श के सज्जादानशीन मियाँ मोहम्मद लतीफ़ ने कहा कि "ख़ुदा का शुक्र है कि वो ख़्वाजा की चौखट पर हाज़री देने आ सके हैं."
उन्होंने कहा कि "फ़िज़ा में दोस्ती की हवा है, लेकिन अभी दोनों देशों को बहुत कुछ करना है क्योंकि वीज़ा मिलने में अब भी परेशानियाँ आ रही हैं."
लतीफ़ ने कहा कि ख़्वाजा मोइनुद्दीन भारत आने से पहले लाहौर की दरगाह पर आए थे और इसलिए वह दस्तूर की पगड़ी का टुकड़ा नज़र करने आए हैं.
शिकायतें
कुछ तीर्थयात्रियों ने यात्रा और प्रबंध संबंधी शिकायतें भी की.
लाहौर के हाजी ख़ालिद महमूद ख़ान कहते हैं कि उन्हें 17 घंटे तक अटारी स्टेशन पर पड़े रहना पड़ा. उनका कहना है कि 10 दिन की वीज़ा अवधि के चार दिन आवागमन में ही ख़राब हो गए.
उनका कहना है कि वह वह दोनों देशों की प्रगति और कल्याण के लिए दुआ करेंगे.
एक और तीर्थयात्री मोहम्मद ताहिर कहने लगे कि भारत से हर वर्ष 13 हज़ार लोग पाकिस्तान आते हैं जिन्हें सिर आँखों पर रखा जाता है.
सिंध के कलंदर बक्श ने प्रबंधों की प्रशंसा की और लोगों के व्यवहार को दोस्ताना बताया.
दरगाह शरीफ़ में खादिम संस्था अंजुमन के सचिव सैय्यद सरवर चिश्ती का कहना था कि दोनों देशों में धार्मिक आवाजाही बढ़नी चाहिए.
उन्होंने कहा कि सूफ़ी मत के लोगों का आना-जाना बढ़ेगा तो अवाम में दोस्ती का नारा और बुलंद होगा.