http://www.bbcchindi.com

शुक्रवार, 13 अगस्त, 2004 को 09:23 GMT तक के समाचार

बाढ़ का ख़तरा बरक़रार, गाँव खाली कराए

भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य में किन्नौर और शिमला ज़िलों में भीषण बाढ़ का ख़तरा बना हुआ है क्योंकि सतलुज और पारीचू नदियों में पानी का स्तर बहुत बढ़ा हुआ है.

इन दोनों नदियों के किनारे बसे 60 गाँवों में रहने वाले हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है.

दरअसल, ग्लेशियर के टुकड़ों की वजह से पारीचू नदी का सामान्य बहाव बाधित हो गया है और उसके पानी से एक अस्थायी झील बन गई है और उसका पानी भारत के गाँवों में घुस रहा है.

भारत के उपग्रह चित्रों से भी पता चला है कि तिब्बत में पारीचु नदी में बनी झील में जलस्तर बढ़ रहा है.

सतलुज का जलस्तर

हिमाचल प्रदेश के आपदा प्रबंधन कक्ष के अध्यक्ष शमशेर सिंह का कहना है कि शुक्रवार को सतलुज का जलस्तर तो सामान्य था लेकिन पानी का रंग मटमैला हो गया था.

उनका कहना था कि राज्य में वे सभी कदम उठाए जा रहे हैं जिनसे बाढ़ आ जाने की सूरत उठाया जाना चाहिए.

भारतीय सेना को सतर्क रहने को कहा गया है और सेना के हेलिकॉप्टर लगातार हवाई निरीक्षण कर रहे हैं.

सतलुज के किनारे एक वायरलेस नेटवर्क स्थापित किया गया है ताकि जल्द से जल्द लोगों को आगाह किया जा सके.

भारत का कहना है कि चीनी अधिकारियों ने सूचना दी है कि झील के ऊपर से बहने वाले पानी का बहाव सामान्य है.

दिल्ली स्थित चीनी दूतावास की प्रवक्ता याँग शुयिंग का कहना है, "उस क्षेत्र में अब भी थोड़ी-थोड़ी देर बाद बारिश हो रही है. यदि लगातार बारिश होती रहती है तो स्थिति ख़तरनाक बन जाएगी. ख़तरा अभी टला नहीं है."

विशेषज्ञों के अनुसार हिमाचल प्रदेश के चार ज़िले प्रभावित हो सकते हैं.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने गुरुवार को कहा था कि पानी बाँध के ऊपर से बह रहा है मगर बाँध अभी टूटा नहीं है.

उन्होंने कहा, "चीन के अधिकारियों से मिली ताज़ा जानकारी के अनुसार बाँध टूटा नहीं है. झील भर चुकी है और पानी बाहर बह रहा है. आपात स्थिति का सामना करने के लिए प्रबंध किए गए हैं."

झील कैसे बनी?

भारत-तिब्बत सीमा से 65 किलोमीटर दूर स्थित ये झील पारीचु नदी जुलाई में भूस्खलन और बर्फ़ानी चट्टानों के गिरने के बाद पानी का बहाव रुक जाने से अस्तित्व में आई.

उन्होंने कहा, "झील का पानी हिमाचल प्रदेश में भर जाने की स्थिति में भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित सांदो गाँव में जलस्तर नदी की सतह से 26 मीटर ऊपर होगा."

उनका कहना था कि सीमा से 45 किलोमीटर आगे भारत के ख़ाब गाँव में, जहाँ सतुलज और स्पिती नदियाँ मिलती हैं, जलस्तर 20 मीटर ऊपर होगा और नाथपा-झाख़ड़ी परियोजना में ये 15 मीटर होगा.

कुंवर शमशेर सिंह ने बताया कि सतलुज विद्युत निगम में कामकाज बंद कर दिया गया है और सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं.

इससे आगे पहला बड़ा शहर रामपुर पड़ता है जहाँ सतलुज का जलस्तर नदी की सतह से 10-15 मीटर ऊपर होगा.

उनके अनुसार इस तरह हिमाचल प्रदेश के चार ज़िले बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं और ये हैं - किन्नौर, शिमला, कुल्लू और बिलासपुर.

लेकिन ज़मीनी इलाक़ों के लिए कोई ख़तरा नहीं है क्योंकि भाखड़ा-नंगल बाँध की क्षमता के मुकाबले में केवल 34 प्रतिशत पानी है और जितना भी पानी वहाँ पहुँचेगा वह वहाँ समा सकता है.

इससे पहले दिल्ली में चीनी दूतावास की प्रवक्ता याँग शुयिंग ने कहा था, "तिब्बत में अब भी वर्षा हो रही है और झील में जल का स्तर बढ़ रहा है. हमारे विशेषज्ञ वहाँ हैं और स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं."

प्रवक्ता याँग शुयिंग का कहना था कि चीन इस विषय में लगातार भारत से संपर्क बनाए हुए है.

उधर भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था, "हमारी राहत टीम हेलिकॉप्टरों और अन्य उपकरणों के साथ किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है."