बुधवार, 04 अगस्त, 2004 को 06:07 GMT तक के समाचार
भारत के राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कोलकाता के युवक धनंजय चटर्जी की माफ़ी की अपील ठुकरा दी है जिसे बलात्कार और हत्या के एक मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई थी.
दिल्ली से बीबीसी संवाददाता अनुराधा प्रीतम के अनुसार गृह मंत्रालय के सूत्रों ने राष्ट्रपति के फ़ैसले की पुष्टि की है.
गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि उन्हें राष्ट्रपति के फ़ैसले के संबंध में उनके कार्यालय से एक पत्र मिला है.
अब गृह मंत्रालय पश्चिम बंगाल सरकार को बुधवार या गुरूवार को औपचारिक तौर पर राष्ट्रपति के फ़ैसले की सूचना देगा.
धनंजय चटर्जी को कोलकाता के अलीपुर जेल में 25 जून को फाँसी दी जानी थी.
मगर सज़ा माफ़ करने के लिए दायर की गई एक अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा टाल दी थी और ये कहा था कि इस बारे में अब कोई भी फ़ैसला राष्ट्रपति ही कर सकते हैं.
राष्ट्रपति के इस फ़ैसले के बाद धनंजय के वकील ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया है कि अब भी उनके सारे विकल्प ख़त्म नहीं हुए हैं और वे संविधान की धारा 32 के तहत अपील कर सकते हैं.
उनका कहना है कि धनंजय के मामले में सुनवाई में बहुत अधिक देरी हुई है और वह पिछले 14 वर्षों से जेल में बंद है इसलिए अब उसे फाँसी की सज़ा देना न्यायसंगत नहीं होगा.
मामला
धनंजय चटर्जी ने 1990 में कोलकाता में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी.
1991 में एक सत्र न्यायालय ने धनंजय को मौत की सज़ा सुनाई.
बाद में उच्च न्यायालय और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी फ़ैसले को बरकरार रखा.
राष्ट्रपति और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल वीरेन शाह ने भी धनंजय की माफ़ी की अर्जी ठुकरा दी थी.
मगर मौत की सज़ा का विरोध करने वाले कई मानवाधिकार संगठन धनंजय को सुनाई गई सज़ा का विरोध कर रहे हैं.
अब राष्ट्रपति के फिर से धनंजय की माफ़ीनामे की अर्ज़ी को ठुकरा दिए जाने के बाद धनंजय को फाँसी दिया जाना लगभग तय समझा जा रहा है.