शुक्रवार, 30 जुलाई, 2004 को 20:13 GMT तक के समाचार
सुबीर भौमिक, बीबीसी संवाददाता
भारत सरकार और नगा अलगाववादी संगठन एनएससीएन ने संघर्षविराम एक साल और बढ़ाने का फ़ैसला किया है.
थाईलैंड के शहर चियांग माइ में दोनों पक्षों के नेताओं के बीच हुई बातचीत में ये फ़ैसला किया गया.
भारत सरकार और नगा विद्रोहियों के बीच पिछले सात वर्षों से बातचीत चल रही है जिसका कोई नतीजा नहीं निकल सका है.
पाँच दशक पुरानी नगा समस्या भारत की सबसे पुरानी चरमपंथी समस्या है.
भारत सरकार और नगा विद्रोहियों के बीच बातचीत 1997 से चल रही है जब विद्रोहियों ने हिंसा की जगह बातचीत से समस्या के हल का फ़ैसला किया.
बातचीत
भारत सरकार की तरफ़ से बातचीत में प्रमुख वार्ताकार डी पद्मनाभैया ने बीबीसी को बताया कि भारत सरकार के साथ नगा विद्रोहियों की बातचीत फिर से पटरी पर आ गई है.
भारत के पूर्व गृहसचिव पद्मनाभैया ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी भी बरकरार हैं मगर दोनों ने बातचीत जारी रखने का फ़ैसला किया है.
एनएससीएन के आईज़ैक मुईवा गुट के प्रवक्ता के चवांग ने संघर्षविराम विस्तार के फ़ैसले की पुष्टि तो की मगर इस विषय में अधिक कुछ बता पाने में अक्षमता ज़ाहिर की.
प्रवक्ता ने कहा कि एनएससीएन(आईएम) बातचीत जारी रखना चाहता है ताकि समस्या का कोई शांतिपूर्ण समाधान निकल सके.
बातचीत
भारत की नई सरकार ने ये स्पष्ट कर दिया है कि वे नगा विद्रोहियों की एक सबसे महत्वपूर्ण माँग को नहीं मान सकते.
नगा विद्रोही चाहते हैं कि पूर्वोत्तर भारत के कुछ राज्यों के नगा बहुल क्षेत्रों को भी नगालैंड में मिलाकर वृहत नगालैंड बनाया जाए.
भारत सरकार के इस माँग को ठुकराने पर नगा नेताओं ने नाराज़गी प्रकट की है.
विद्रोही इस बात से भी नाराज़ हैं भारत सरकार ने आख़िरी मौक़े पर बातचीत का स्थान बैंकॉक की जगह चिआंग माइ कर दिया.
विद्रोहियों ने आरोप लगाया है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि विद्रोही भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से न मिल सकें जो एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए बैंकॉक गए हुए हैं.