शुक्रवार, 23 जुलाई, 2004 को 17:59 GMT तक के समाचार
आलोक प्रकाश पुतुल
छत्तीसगढ़
धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में इस बार अच्छी बारिश के अभाव में धान की फसल ख़राब हो रही है.
आषाढ़ के गुजर जाने के बाद भी कम बारिश ने किसानों को चिंता में डाल रखा है.
लेकिन राज्य की भाजपा सरकार के कृषि मंत्री ननकी राम कंवर ने इस परेशानी से बचने का एक नायाब तरीक़ा ढ़ूंढ निकाला और इंद्र देवता को प्रसन्न करने की ठानी.
उन्होंने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक विशाल वरुण महायज्ञ करवाया.
इससे पहले राजस्थान की भाजपा सरकार इस तरह का यज्ञ करवा चुकी है.
तीन दिनों तक चले इस यज्ञ में दर्जन भर पंडित ननकी राम कंवर के राजपुरोहित काशीप्रसाद पांडेय की देखरेख में 51 हज़ार वरुण मंत्र का जाप कर इंद्र देवता को प्रसन्न करने में लगे रहे.
लेकिन आज के इस वैज्ञानिक युग में इन मंत्रों से कुछ होगा?
इस सवाल पर मंत्री कंवर कहते हैं - "यज्ञ के सामने विज्ञान कुछ नहीं है और मंत्रों के कंपन्न व लहर की शक्ति से प्रकृति संचालित होती है. इंद्र देवता के प्रसन्न होते ही वर्षा होगी."
कंवर ने इस यज्ञ में शामिल होने के लिए राज्य के सभी मंत्रियों और अफ़सरों को आमंत्रण दिया था.
इस महायज्ञ में राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी अपने मंत्रिमंडल के दूसरे सहयोगियों के साथ शामिल हुए.
उन्होंने कंवर के निवास पर इस महायज्ञ के एक हिस्से के रुप में पंडितों के निर्देश पर आम का पौधा भी लगाया.
राज्य के कई आला अधिकारी हर रोज़ इस आयोजन में भागीदारी निभाते रहे.
कंवर की राय है कि किसान पूजा-पाठ में विश्वास रखते हैं और पुराने ज़माने में भी इंद्र देवता को प्रसन्न करने के लिए इस तरह के आयोजन होते रहे हैं.
ऐसे में वरुण महायज्ञ की सफलता को कटघरे में खड़ा करना अनुचित है.
असहमति और विरोध
लेकिन अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश मिश्र कंवर की इस राय से सहमत नहीं हैं.
वे इसे पाखंड और जनता में अंधविश्वास फैलाने वाला क़दम बताते हैं.
इस यज्ञ के औचित्य पर सवाल खड़े करते हुए वे कहते हैं, "कृषि मंत्री को इस तरह के अंधविश्वास में फंसने के बजाय किसानों को खाद और बीज उपलब्ध कराने की कोशिश करनी चाहिए थी लेकिन वे वरुण महायज्ञ जैसे अवैज्ञानिक उपक्रम में अपना समय ज़ाया कर रहे हैं."
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने तो मंत्री के ख़िलाफ़ मोर्चा ही खोल दिया है.
पार्टी ने आरोप लगाया है कि वैज्ञानिक चेतना के प्रसार को बढ़ावा देने तथा मानसून के वैज्ञानिक कारणों को लोगों को बताने के बजाय कृषि मंत्री द्वारा ऐसा आयोजन पूरी तरह से अंधविश्वासपूर्ण और नियतिवादी सोच को बढ़ाने वाला है.
माकपा के राज्य सचिव मंडल के युवा नेता संजय पराते का आरोप है कि कंवर ने इस यज्ञ को सरकारी आयोजन में तब्दील कर दिया.
उनका कहना है, "कृषि मंत्री अपनी निजी ज़िंदगी में अवैज्ञानिक और अंधविश्वासी विचारों पर आधारित आचरण करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन सार्वजनिक जीवन में ऐसा नहीं किया जाना चाहिए. राज्य के अफ़सरों और नेताओं को यज्ञ में शामिल होने का न्यौता देकर मंत्री ने अंधविश्वासों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया है. इसके लिए उन्हें सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए."
फ़िलहाल तीन दिनों का यज्ञ ख़त्म हो चुका है और किसानों को अब भी बारिश का इंतज़ार है.