गुरुवार, 08 जुलाई, 2004 को 17:50 GMT तक के समाचार
भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि रक्षा ख़र्च में क़रीब 18 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कोई उकसाने वाली कार्रवाई नहीं है.
भारतीय बजट पर बीबीसी वर्ल्ड के विशेष कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा कि सुरक्षा बलों को आधुनिक बनाने के लिए जो ख़रीद हुए हैं उनका बकाया चुकाने के लिए यह बढ़ोत्तरी की गई है.
इस कार्यक्रम का संचालन किया वरिष्ठ पत्रकार करण थापर ने.
वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले तीन साल के रक्षा ख़र्चों पर अगर नज़र डाली जाए तो पता चल जाएगा कि करगिल युद्ध के बाद के वर्ष को छोड़कर इसमें ज़्यादा कुछ बदलाव नहीं हुआ है.
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पाकिस्तान के शांति वार्ता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
विदेशी निवेश के मुद्दे पर वामपंथियों की शिकायत के बारे में वित्त मंत्री ने कहा, "हमने बुनियादी शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए इतना किया है. इसलिए भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए मैंने जो किया है उसके लिए वामपंथी दल भी अपनी एक-दो माँग छोड़ सकते हैं."
वित्त मंत्री ने कहा कि वे वामपंथी दलों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, "हम सभी मुद्दों पर तो एकमत नहीं हो सकते. लेकिन अगर एक-दो मुद्दों पर असहमति होती भी है तो हमें मतभेदों को भुला देना चाहिए."
आम जनता का बजट
वित्त मंत्री ने काँग्रेस गठबंधन सरकार के बजट को भारतीय जनता का बजट बताया.
चिदंबरम ने कहा, "हमने बजट से यह संदेश देने की कोशिश की है कि हम आम जनता का कितना ख़्याल रखते हैं. हम यह भी दिखाना चाहते हैं कि हमें समाज के एक बड़े तबके की कितनी चिंता है."
सात से आठ फ़ीसदी विकास दर हासिल करने के लक्ष्य को लेकर जब उनसे औद्योगिक विकास पर सवाल पूछे गए, तो वित्त मंत्री ने सरकार की ओर से की जाने वाली कोशिशों का हवाला दिया.
उन्होंने कहा, "मैं औद्योगिक उत्पादन तो नहीं बढ़ा सकता लेकिन इसके लिए अनुकूल माहौल ज़रूर तैयार कर सकता हूँ. हमने निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कोशिशें की है."
वित्त मंत्री ने कहा कि शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद का छह प्रतिशत ख़र्च करने और स्वास्थ्य सेवाओं पर ख़र्च बढ़ाने के बारे में सरकार गंभीर है.
दूरसंचार, बीमा और नागरिक उड्डयन जैसे क्षेत्र में विदेशी निवेश के स्वरूप के बारे में वित्त मंत्री ने कहा कि इसके लिए निवेश आयोग का गठन किया जाएगा.