सोमवार, 05 जुलाई, 2004 को 16:12 GMT तक के समाचार
श्रीनगर में 115 साल पुराना एक स्कूल आग में बुरी तरह नष्ट हो गया है जिसके बाद वहाँ तनाव का माहौल है.
जम्मू कश्मीर पुलिस का कहना है कि इस्लामिया हाई स्कूल में आग सोमवार तड़के तीन बजे लगी और थोड़ी ही देर में पूरे परिसर में फैल गई.
परिसर में तीन इमारतें थीं और लकड़ी से बनी ये इमारतें बुरी तरह जल गईं.
अभी आग लगने के निश्चित कारण का पता नहीं चल सका है.
मगर हुर्रियत नेता मौलवी उमर फ़ारूख़ ने कहा है कि ऐसे प्रमाण हैं जिनसे लगता है कि आग जान-बूझकर लगाई गई.
किसी के हताहत होने की भी कोई सूचना नहीं आई है.
इस घटना के बाद लोगों ने सड़कों पर निकलकर विरोध भी प्रकट किया.
उन्होंने पत्थबाज़ी कर कई वाहनों को भी नुक़सान पहुँचाया जिससे यातायात पर असर पड़ा.
तोड़फोड़ की कार्रवाई
ये स्कूल अंजुमने नुसरतुल इस्लाम नाम की संस्था चलाती थी जिसके प्रमुख हुर्रियत नेता मौलवी उमर फ़ारूख़ हैं.
मौलवी उमर फ़ारूख़ ने इस घटना को तोड़-फोड़ की कार्रवाई बताया है.
उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया मगर इस संभावना से इनकार नहीं किया कि इसके पीछे वे लोग हो सकते हैं जिन्होंने हाल ही में उनके चाचा की हत्या की.
उनके चाचा मुश्ताक अहमद की मई महीने में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
इसी दिन मौलवी फ़ारूख़ के घर पर भी हथगोले फेंके गए थे.
उन्होंने कहा,"ऐसा लगता है कि ये उन लोगों का काम है जो कश्मीर के गौरवशाली अतीत को लूटना चाहते हैं."
हुर्रियत कॉंफ़्रेंस ने कश्मीर के इस पुराने स्कूल के जल जाने पर गहरा अफ़सोस प्रकट किया है.
वहीं एक चरमपंथी गुट अल उमर मुजाहिदीन ने आरोप लगाया है कि ये आग भारत की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने लगवाई.
पुराना स्कूल
मौलवी उमर फ़ारूख़ के परदादा मौलाना ग़ुलाम रसूल शाह ने 1889 में इस स्कूल की स्थापना की थी.
मौलाना ग़ुलाम रसूल शाह को कश्मीर के सर सय्यद के नाम से भी पुकारा जाता है और उन्होंने कश्मीर में शिक्षा के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाई थी.
राज्य के कई नामी राजनेता, नौकरशाह और बुद्धिजीवी इस स्कूल के छात्र रह चुके हैं.
कश्मीर के सबसे बड़े नेता शेख़ अब्दुल्ला ने भी यहीं से पढ़ाई की थी.