मंगलवार, 29 जून, 2004 को 14:57 GMT तक के समाचार
भारत की व्यावसायिक राजधानी मुंबई में अधिकारियों ने तीन तेंदुओं को पकड़ लिया है.
हाल के दिनों में तेंदुओं ने इंसानों पर बहुत से हमले किए और सिर्फ़ जून महीने में ही 12 लोगों की जान जा चुकी है.
तेंदुओं के हमले 2003 के शुरू में हुए थे और तब से अब तक क़रीब 35 लोगों की जान तेंदुए ले चुके हैं.
तेंदुओं के इन हमलों से लोगों में भारी दहशत फैल गई थी और लोगों का जीना दूभर हो गया था, ख़ास तौर से रात को लोग सो नहीं पाते थे क्योंकि तेंदुओं के ज़्यादातर हमले रात को ही होते थे.
अधिकारियों का कहना है कि ये तेंदुए संजय गाँधी राष्ट्रीय पार्क से बस्तियों में आ जाते थे.
अधिकारियों ने तेंदुओं के मुँह ख़ून लगने के लिए इंसानों को ही ज़िम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि पार्क के आसपास अवैध निर्माण से तेंदुए अपने भोजन की तलाश में बस्तियों में आ जाते हैं.
तेंदुओं के ज़्यादातर हमले पार्क के आसपास की बस्तियों में ही हुए हैं.
अब अधिकारियों का कहना है कि तेंदुओं की भोजन ज़रूरतों को पूरा करने के लिए क़रीब 500 सूअर पार्क में छोड़े जाएँगे.
और पार्क की बाड़ की ऊँचाई भी बढ़ाने की योजना है ताकि तेंदुए आसानी से उस पर से छलाँग न लगा सकें.
संजय गाँधी राष्ट्रीय पार्क क़रीब 100 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े में फैला है जिसे जीव-जंतुओं के लिए स्वर्ग के समान माना जाता है. अनुमान के मुताबिक़ इस पार्क में क़रीब 30 तेंदुए हैं.
घुसपैठ
वन अधिकारियों का कहना है कि संजय गाँधी पार्क की ज़मीन पर घुसपैठ करके क़रीब दो लाख लोगों ने अपनी बस्तियाँ बसा ली हैं जिससे तेंदुओं का ख़तरा बढ़ा है.
दूसरी तरफ़, स्थानीय लोग अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं और ख़ासे नाराज़ हैं.
लेकिन एक वन्य अधिकारी अशोक खोट ने कहा कि इलाक़े के लोगों को बहुत चौकसी बरतने की ज़रूरत है.
लेकिन बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद का कहना है कि बढ़ती आबादी को देखते हुए हालात में सुधार करना आसान नहीं होगा.
जीव-जंतुओं के जानकारों का कहना है कि तेंदुए आम तौर पर आदमख़ोर नहीं होते हैं इसलिए उनके ज़्यादातर हमले रात में होते हैं और वे भ्रम में इंसानों को अपना शिकार ही समझ लेते हैं.