शनिवार, 26 जून, 2004 को 11:55 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मीर ज़फ़रूल्ला ख़ान जमाली ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है और अपने मंत्रिमंडल को भंग कर दिया है.
जमाली ने पार्टी की ओर से चौधरी शुजात हुसैन को नए नेता के रूप चुना है. लेकिन यह व्यवस्था अस्थायी है.
सूचना मंत्री शेख़ रशीद ने बताया कि शुजात हुसैन का चयन अंतरिम है. बीबीसी संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि ख़राब स्वास्थ्य के कारण शुजात हुसैन पद नहीं संभालना चाहते.
रशीद ने कहा, "पूर्व वित्त मंत्री शौकत अज़ीज नेशनल एसेंबली के लिए चुन लिए जाने के बाद प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे. "
शौकत अज़ीज़ अभी सीनेट के सदस्य हैं. अज़ीज़ को पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का क़रीबी माना जाता है.
पाकिस्तान के संविधान के अनुसार प्रधानमंत्री बनने के लिए नेशनल एसेंबली का सदस्य रहना ज़रूरी है.
सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग और उसके गठबंधन में शामिल दलों की एक आपात बैठक में जमाली ने अपने त्यागपत्र की घोषणा की.
जमाली ने इससे पहले राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से भी मुलाक़ात की थी.
पहले से समाचार माध्यमों में ख़बर थी कि प्रधानमंत्री जमाली ने इस्तीफ़ा दे दिया है और सिर्फ़ इसकी औपचारिक घोषणा बाक़ी थी.
बाद में गठबंधन की बैठक से पहले सूचना मंत्री शेख़ रशीद ने पत्रकारों को जमाली के त्यागपत्र के बारे में जानकारी दी.
बैठक में अपने त्यागपत्र की घोषणा करते हुए जमाली ने कहा, "मैंने देश और पार्टी के हित में इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है. मैंने नए नेता के रूप में शुजात हुसैन का चयन किया है."
उन्होंने बताया कि पार्टी ने उन्हें नए नेता के चयन के लिए अधिकृत किया था.
जमाली ने बताया कि चौधरी शुजात हुसैन सोमवार को विश्वास मत हासिल करेंगे और गठबंधन ने उनका समर्थन करने का फ़ैसला किया है.
पाकिस्तान के विपक्षी नेता मौलाना फ़ज़लुर रहमान ने बीबीसी से कहा, "इससे यही दिखता है कि पाकिस्तान में हुकूमतें सेना के हाथ की कठपुतलियाँ हैं और देश में लोकतंत्र का केवल नाम भर है".
मुशर्रफ़-जमाली मतभेद
पिछले कुछ महीनों से जमाली और मुशर्रफ़ के बीच संबंध ख़राब होने को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं.
बताया जा रहा था कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की नीतियों का पूरी तरह पालन नहीं होने के कारण दोनों के बीच मतभेद गहराते जा रहे थे.
लेकिन स्वयं जमाली ने कई बार ऐसी अटकलों को निराधार बताया था.
जमाली नवंबर 2002 में आम चुनाव के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे.
पाकिस्तान में 1999 में तख़्तापलट के बाद सत्ता संभालने के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ ने 2002 में पहली बार चुनाव करवाए थे.