शुक्रवार, 25 जून, 2004 को 13:00 GMT तक के समाचार
बलात्कार और हत्या के एक मामले में कोलकाता के एक युवक को मौत की सज़ा सुनाई गई है और अब इस बारे में राष्ट्रपति के अंतिम फ़ैसले की प्रतीक्षा की जा रही है.
पश्चिम बंगाल के धनंजय चटर्जी को कोलकाता के अलीपुर जेल में शुक्रवार को फांसी दी जानी थी.
मगर गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा को दो दिन के लिए टाल दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया और अंतिम फ़ैसला राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम पर छोड़ दिया.
अदालत ने कहा कि धनंजय की माफ़ी की अर्जी राष्ट्रपति के पास है इसलिए वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकती.
राष्ट्रपति के पास सज़ा को माफ़ करने का अधिकार है और फ़िलहाल वे इस बारे में समीक्षा कर रहे हैं.
राष्ट्रपति के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया है कि राष्ट्रपति इस संबंध में गृह मंत्रालय से सलाह ले रहे हैं और उसके विचार जानने के बाद ही वे कोई फ़ैसला करेंगे.
धनंजय चटर्जी ने 1990 में कोलकाता में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी.
1991 में एक सत्र न्यायालय ने धनंजय को मौत की सज़ा सुनाई.
बाद में उच्च न्यायालय और उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने भी फ़ैसले को बरकरार रखा.
इस महीने राष्ट्रपति और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल वीरेन शाह ने भी धनंजय की माफ़ी की अर्जी ठुकरा दी थी.
मगर मौत की सज़ा का विरोध करने वाले कई मानवाधिकार संगठन धनंजय को सुनाई गई सज़ा का विरोध कर रहे हैं.