गुरुवार, 24 जून, 2004 को 13:19 GMT तक के समाचार
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरूवार को पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया.
अपने संबोधन में उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की नीतियों का ज़िक्र करते हुए जनता की आशाओं को पूरा करने का भरोसा दिलाया.
उन्होंने भाषण में आर्थिक नीतियों, आर्थिक सुधार और विदेश नीति की भी चर्चा की साथ ही समाज के कमज़ोर तबकों की रक्षा करने का भी भरोसा दिलाया.
प्रधानमंत्री सिंह के भाषण का प्रसारण भारत के सरकारी टेलीविज़न और रेडियो पर हुआ.
उन्होंने कहा कि वे सार्वजनिक जीवन में इसलिए उतरे क्योंकि वे यह मानते हैं कि लोकतंत्र में ऐसे पेशेवर लोगों को और आगे जाने की ज़रूरत है जो राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकें.
गांधी और संसद की गरिमा
उन्होंने पिछले दिनों संसद में विपक्षी दलों के विरोध के कारण मचे हंगामे का ज़िक्र करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में सकारात्मक बातचीत और बहस की तय व्यवस्था में बाधा डाला जाना और उसे नहीं चलने देना चिंताजनक है.
आर्थिक नीतियाँ और सुधार
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार का साझा न्यूनतम कार्यक्रम इस बात की पहचान करता है कि आर्थिक विकास की गति बढ़ानेवाली नीतियों का सबको न्यायोचित फ़ायदा मिले रोज़गार के नए अवसरों का सृजन हो.
उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधार केवल सरकारी कंपनियों को नौकरशाही की बेड़ियों से आज़ाद करने का नाम नहीं है बल्कि इससे सरकार की सक्रियता बढ़ाने और उसे जनता के और नज़दीक लाने का भी उद्देश्य सधता है.
ये कहते हुए कि सरकार के पास अभी जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए उचित संसाधन नहीं है, उन्होंने कहा कि सरकार और सरकारी संस्थानों में सुधार ज़रूरी है और वे इसे प्राथमिकता देंगे.
लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी भरोसा दिलाया कि वे इस दायित्व को कभी नहीं भूलेंगे कि वे एक ऐसी सरकार चला रहे हैं जो जनता के लिए काम करती है.
किसान और खेती
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का न्यूनतम कार्यक्रम ग्रामीण भारत को एक 'नई सौगात' देने के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में किसानों के सामने अभी भी काफ़ी बाधाएँ हैं जिनको दूर करना ज़रूरी है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि वे पूरे देश में कृषि और औद्योगिक उत्पादों के लिए 'एक बाज़ार' देखना चाहते हैं जिससे खेती और उद्योग के रिश्तों को मज़बूती मिल सके.
विदेश नीति
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ व्यापक बातचीत जारी रहेगी और भारत जम्मू कश्मीर समेत सभी मुद्दों को गंभीरता से सुलझाना चाहता है.
उन्होंने कहा कि आतंकवाद और हिंसा से शांति प्रक्रिया पर धब्बा लग सकता है.
उन्होंने चीन के साथ संबंधों को सकारात्मक बताया और कहा कि अमरीका के साथ भी भारत के संबंध महत्वपूर्ण हैं.
उन्होंने इसके साथ ही रूस, दक्षिण पूर्व और पश्चिम एशिया, लातिनी अमरीका, अफ़्रीका और यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को मज़बूत करने और उनके साथ सहयोग बढ़ाने पर बल दिया.
उन्होंने साथ ही कहा कि भारत सुरक्षा के लिए न्यूनतम परमाणु शक्ति बनाए रखेगा और पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर अमल जारी रखेगा.
कश्मीर
कश्मीर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार हुर्रियत और जम्मू कश्मीर के सभी अन्य गुटों के साथ बातचीत जारी रखेगी.
उन्होंने कहा कि सरकार अन्य गुटों से भी बातचीत करने को तैयार है बशर्ते वे हिंसा का मार्ग त्याग दें.
अल्पसंख्यक और महिलाएँ
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनकी बेहतरी के लिए कृतसंकल्प है.
उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े वर्ग तथा सभी कमज़ोर तबकों के हितों का ख़याल रखा जाएगा.
उन्होंने महिलाओं को भी उचित भागीदारी देने का भरोसा दिलाया.