शुक्रवार, 18 जून, 2004 को 11:35 GMT तक के समाचार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मनाली यात्रा के दौरान लगभग हर रोज़ आ रहे उनके बयानों के क्रम में फिर एक बयान जुड़ा है.
चुनाव में पार्टी को मिली पराजय की एक वजह गुजरात के दंगे बताने और वहाँ के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने संबंधी बयानों के बाद अब उन्होंने हार की 'अधिकतर ज़िम्मेदारी' अपने ऊपर ले ली है.
वाजपेयी ने हार की ये ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा कि वह इसके लिए प्रायश्चित्त करने को तैयार हैं.
मनाली में छुट्टियाँ ख़त्म करने के एक दिन पहले उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "हार की अधिकतम ज़िम्मेदारी मैं लेता हूँ क्योंकि चुनाव मेरे ही नाम पर लड़े गए थे. इसका प्रायश्चित्त मैं ही करूँगा."
वाजपेयी से जब ये पूछा गया कि आम तौर पर हार के बाद पार्टी अध्यक्ष इसकी ज़िम्मेदारी लेकर इस्तीफ़ा देते हैं तो वेंकैया नायडू ने ऐसा क्यों नहीं किया तो उन्होंने कहा कि हार किसी एक व्यक्ति की नहीं है बल्कि ये 'समग्र पराजय' है.
'उपाय ढूँढ़ने होंगे'
उन्होंने ने इस हार की वजह तलाश करने पर ज़ोर देते हुए कहा कि उसके उपाय ढूँढ़ने होंगे.
पूर्व प्रधानमंत्री से जब ये पूछा गया कि वह किस तरह के प्रायश्चित्त की बात कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि और काम करने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा कि कोशिशें दोगुनी करनी होंगी और जहाँ कमियाँ हैं उन्हें दूर करना होगा.
इससे पहले वह गुजरात के मसले पर 22 जून को मुंबई में होने वाली पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चर्चा की बात भी कह चुके हैं.
उन्होंने कहा था, "हम मुंबई में गुजरात पर चर्चा करेंगे. हम खुले दिमाग़ से चर्चा करेंगे. हम ऐसे मुद्दे पर चर्चा, जीत और हार दोनों ही परिस्थितियों में करते हैं. हम चर्चा करने से नहीं डरेंगे."
इस तरह लोगों की नज़रें अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक पर लगी हैं क्योंकि गुजरात और मोदी को लेकर पार्टी में हाल में हुई बयानबाज़ी की वजह से ये बैठक महत्त्वपूर्ण होगी.