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शुक्रवार, 18 जून, 2004 को 15:45 GMT तक के समाचार

ब्यौरा माँगा मानवाधिकार आयोग ने

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गुजरात पुलिस से उस मुठभेड़ के बारे में जानकारी माँगी है जिसमें 'चार आतंकवादियों' के मारे जाने का दावा किया गया था.

गुजरात पुलिस ने दावा किया था कि वे चारों लोग चरमपंथी संगठन लश्करे तैबा के सदस्य थे.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने समाचार माध्यमों की रिपोर्टों को देखते हुए ख़ुद ही यह क़दम उठाया है और अहमदाबाद पुलिस को रिपोर्ट देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है.

आयोग के प्रवक्ता के मुताबिक़, पुलिस को हिदायत दी गई है कि वह छानबीन में आयोग के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करे.

मुठभेड़ में मारी गईं मुंबई निवासी छात्रा इशरत जहाँ की माँ ने पूरे मामले की सीबीआई से जाँच कराए जाने की माँग की है.

गुजरात पुलिस ने 15 जून को चार कथित चरमपंथियों को मारने का दावा किया था और कहा था कि वे लोग मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साज़िश रच रहे थे.

मारे गए चार लोगों में इशरत जहाँ भी शामिल थीं लेकिन गुरुवार को मुंबई पुलिस ने प्राथमिक जाँच के आधार पर कहा कि इशरत जहाँ के चरमपंथियों के साथ संबंध के कोई सबूत नहीं मिले हैं.

अब इस मामले में मुंबई पुलिस आधिकारिक जाँच कर रही है.

उधर गुजरात में विपक्षी दल काँग्रेस के नेता अमर सिंह चौधरी ने भी गुरुवार को पूरे मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से कराए जाने की माँग की थी.

'मेरी बेटी निर्दोष'

इशरत जहाँ की माँ शमीमा जहाँ अपने रिश्तेदारों के साथ शुक्रवार सुबह अहमदाबाद पहुँचीं.

समाचार एजेंसियों के अनुसार उनका कहना था, "मेरी बेटी निर्दोष थी और उसका 'आतंकवादी गतिविधियों' से कोई वास्ता नहीं था.

गुजरात पुलिस के अधिकारियों ने कहा था कि उन्हें पहले से ही ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि लश्कर-ए-तैबा का एक आत्मघाती दस्ता मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से शहर में पहुँच गया है.

गुरुवार को ये भी कहा गया कि ख़ुफ़िया एजेंसियों के लोगों ने कई महीने से इशरत के आने-जाने और लोगों से मिलने पर नज़र रखी हुई थी.

इशरत 19 वर्षीय थीं और मुंबई में ख़ालसा कॉलेज में बीएससी में पढ़ती थीं.