गुरुवार, 17 जून, 2004 को 08:26 GMT तक के समाचार
शालिनी जोशी
कंचन चौधरी भट्टाचार्य देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी हैं जिन्हें किसी राज्य का पुलिस महानिदेशक बनाया गया है.
1973 बैच की आईपीएस अधिकारी कंचन चौधरी ने इस लिहाज़ से इतिहास बनाया है.
उन्हें मंगलवार को उत्तरांचल के पुलिस महानिदेशक का पद सौंपा गया.
साढ़े तीन साल पहले बने उत्तरांचल राज्य की वह तीसरी डीजीपी हैं. इससे पहले अशोककांत शरण और पी डी रतूड़ी इस पद पर रह चुके हैं.
दूरदर्शन पर 1990 के दशक में जिन्होंने भी उड़ान नाम का धारावहिक देखा होगा, कंचन चौधरी को देखकर उसके दृश्य ज़रूर ताज़ा हो जाएंगे.
सादगी से भरी कंचन चौधरी भट्टाचार्य के व्यक्तित्व में स्त्री सुलभ सौम्यता तो है लेकिन साथ उतनी ही पेशेवर दृढ़ता भी है.
आला पुलिस अधिकारियों के साथ पहली बैठक में उन्होंने इस बात के संकेत दे दिए. उन्होंने कहा, “जो लोग भी पुलिस सेवा में रहते हुए ग़लत काम कर रहे हैं वे सही रास्ते पर आ जाएँ वरना मेरे पास ज़्यादा वक्त नहीं है और फिर मैं ऐक्शन लेने में देर नहीं करूँगी.”
'सख़्त अधिकारी'
तो क्या फिर वह बेहद सख़्त पुलिस अफसर होंगी?
जवाब में कंचन कहती हैं, “नहीं मैं सख्त नहीं हूं, संवेदनशील हूँ, दृढ़ हूँ और कुछ चीज़ों में कभी समझौता नहीं कर सकती जैसे अगर किसी का इरादा नेक नहीं हो तो मैं सहन नहीं कर सकती.”
वह स्वीकार करती हैं कि अलग उत्तरांचल बनने के बाद राज्य में कानून और व्यवस्था की हालत बिगड़ी है और उनका कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता यही होगी कि पुलिस विभाग में आम आदमी का भरोसा बहाल हो.
कंचन चौधरी इससे पहले राज्य पुलिस के सतर्कता विभाग में तैनात थीं और वहीं उन्होंने पुलिस विभाग के अलावा अन्य सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार के मामलों की जाँच के दौरान जन शिकायतों की सच्चाई को क़रीब से देखा.
उनका कहना है, “मेरा ध्यान जनता की तक़लीफों को दूर करने पर तो होगा ही मैं ये भी देखूंगी कि आम पुलिसकर्मियों की मुश्किलें भी दूर हों ताकि उनमें हीन भावना न आए.”
'उड़ान की मंज़िल'
एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से भारतीय पुलिस सेवा तक का सफ़र तय करने वाली कंचन चौधरी के जीवन पर ही बहुचर्चित धारावाहिक 'उड़ान' बना था.
इसके अलावा उसकी निर्देशक कोई और नहीं बल्कि कंचन की बहन कविता चौधरी ही थीं और तो और 'उड़ान' में संघर्षशील पुलिस अधिकारी के रूप में उनका किरदार भी कविता ने ही निभाया था.
ये पूछे जाने पर कि क्या 'उड़ान' को मंज़िल मिल गई है तो इस पर उनका कहना था “इसे मंज़िल मैं तब समझूंगी जब सोचे हुए पर ठीक से अमल कर पाऊं.”
कंचन चौधरी के पति एक मशहूर उद्योगपति हैं और उनकी दो बेटियाँ हैं जो विदेश में शिक्षा ले रही हैं.
इस लिहाज़ से सुव्यवस्थित जीवन के समांतर पुलिस की तनाव भरी नौकरी में वह कैसे सामंजस्य बनाती हैं और वो भी तब जब वो एक महिला हैं.
इस पर कंचन का कहना है “इकत्तीस साल पहले जब नौकरी शुरू की थी तब कुछ असहजता होती थी लेकिन जब धीरे-धीरे समझ में आता गया कि इसी के बीच नौकरी करनी और आगे बढ़ना है तब सारे क्लेश मिटते गए”
कंचन चौधरी पिछले साल ही उत्तरांचल की तैनाती पर आईं थीं. इससे पहले वह मुंबई में सीआईएसएफ में महानिरीक्षक थीं. वह यूपी कैडर की थीं लेकिन बाद में उन्होंने उत्तरांचल कैडर ले लिया था.