गुरुवार, 17 जून, 2004 को 15:12 GMT तक के समाचार
गुजरात में हाल में मारे गए चार कथित चरमपंथियों का मामला विवादों में घिर गया है.
गुजरात में विपक्षी दल काँग्रेस के नेता अमर सिंह चौधरी ने इसे 'फ़र्ज़ी' मुठभेड़ बताते हुए
माँग की है कि पूरे मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए.
मुंबई पुलिस ने कहा है कि प्राथमिक जाँच के आधार पर मारी जाने वाली मुंबई निवासी लड़की इशरत जहान के चरमपंथियों के साथ संबंध के कोई सबूत नहीं मिले हैं.
समाचार एजेंसियों के अनुसार महाराष्ट्र की सरकार ने गुरुवार को एक जाँच के आदेश दिए हैं ताकि पक्के तौर पर ये पता लगाया जा सके कि क्या इशरत का किसी चरमपंथी संगठन से कोई संबंध था?
महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने इस जाँच के आदेश दिए हैं.
गुजरात पुलिस ने 15 जून को दावा किया था कि उसने राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से आए चार कथित चरमपंथियों को मार दिया है.
पुलिस के अनुसार चारों कथित चरमपंथी अहमदाबाद हवाई अड्डे के नज़दीक पुलिस के साथ 'मुठभेड़' में मारे गए.
पुलिस अधिकारियों ने उस समय कहा था कि उन्हें पहले से ही ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि लश्कर-ए-तैयबा का एक आत्मघाती दस्ता मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के इरादे से शहर में पहुँच गया है.
काँग्रेस नेता अमर सिंह चौधरी ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "गुजरात पुलिस बार-बार बयान बदल रही है. अहमदाबाद में दाख़िल होने से पहले ये लोग लगभग छह घंटे तक गुजरात की सीमा में रहे, इन्हें तब किसी राजमार्ग पर पुलिस ने क्यों नहीं रोका?"
उनका कहना था कि उन्हें गुजरात की पुलिस पर कोई भरोसा नहीं है और इसीलिए सीबीआई को मामले की जाँच करनी चाहिए.
उधर मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी सूर्यवंशी ने बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अबमद को बताया कि फ़िलहाल तो इशरत जहान को चरमपंथी संगठनों से जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं मिला है लेकिन इस बारे में जाँच जारी है.
इशरत 19 वर्षीय थीं और मुंबई में ख़ालसा कॉलेज में बीएससी में पढ़ती थी.
उनके कॉलेज के सहपाठियों को भी हैरानी हुई है कि गुजरात पुलिस ने उन्हें चरमपंथी बताया है.
और उनके परिवार को तो इशरत के मारे जाने की जानकारी तब मिली जब पत्रकार उनके घर पहुँचे.